अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/काठमांडू | 3 मई 2026
नेपाल की राजनीति में बड़ा और विवादास्पद फैसला सामने आया है। बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के जरिए एक अध्यादेश जारी कर करीब 1500 से अधिक सार्वजनिक नियुक्तियों को रद्द कर दिया है। इस कदम से देश के प्रशासनिक ढांचे में हलचल मच गई है और राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ‘सार्वजनिक पद धारकों को हटाने के लिए विशेष प्रावधानों पर अध्यादेश’ के तहत कुल 1594 नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से अवैध घोषित कर दिया गया है। ये नियुक्तियां पिछली सरकारों के दौरान की गई थीं, जिन्हें मौजूदा सरकार ने राजनीतिक आधार पर हुई नियुक्तियां बताया है।
सरकार का कहना है कि इन पदों पर नियुक्तियां योग्यता के बजाय राजनीतिक सिफारिशों के आधार पर की गई थीं, जिससे सरकारी तंत्र की निष्पक्षता प्रभावित हो रही थी। इस फैसले को सरकार ‘सिस्टम सुधार’ की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
हालांकि, इस निर्णय के बाद स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्रों में अचानक खाली हुए पदों को लेकर चिंता बढ़ गई है। एक साथ इतने बड़े स्तर पर नियुक्तियां रद्द होने से सरकारी कामकाज प्रभावित होने का खतरा जताया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला युवा मतदाताओं को संदेश देने के लिए लिया गया है, जिन्होंने हाल के राजनीतिक बदलाव में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह वास्तव में सुधार की कोशिश है या फिर सत्ता में बैठे लोगों द्वारा अपने समर्थकों के लिए जगह बनाने की रणनीति।
नेपाल में पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता का माहौल रहा है, ऐसे में इस अध्यादेश ने नई बहस को जन्म दे दिया है। कुछ लोग इसे साहसिक कदम मान रहे हैं, तो कुछ इसे संवैधानिक और प्रशासनिक संकट की शुरुआत बता रहे हैं।
फिलहाल, इस फैसले के कानूनी पहलुओं और इसके प्रभाव को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह कदम नेपाल के प्रशासन को मजबूत करेगा या फिर नई राजनीतिक और कानूनी चुनौतियां खड़ी करेगा।




