राष्ट्रीय | हनुमान मिश्रा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 जुलाई 2026
20 जुलाई को CJP के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद और गहरा गया है। प्रदर्शन के दौरान घायल हुए 28 वर्षीय एक स्पोर्ट्स पत्रकार ने दावा किया है कि उनके शरीर में अब भी 30 से ज्यादा पैलेट फंसे हुए हैं। उन्होंने घटना को लेकर मुआवजे की मांग की है।
आउटलुक से जुड़े पत्रकार 20 जुलाई को Cockroach Janta Party (CJP) के संसद मार्च में शामिल हुए थे। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने पर वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, तभी उनकी पीठ पर गोली जैसी तेज चोट लगी।
सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में पैलेट का जिक्र
मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य पत्रकार की मेडिकल रिपोर्ट है। 22 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार उनके दाहिने हाथ, छाती और पीठ पर चोटें दर्ज की गई हैं।
रिपोर्ट में चोटों के संदर्भ में “pellet gun” का उल्लेख किया गया है और डॉक्टरों ने शरीर पर मिले छोटे घावों को पैलेट से होने वाली चोटों के अनुरूप बताया है।
डॉक्टरों ने पत्रकार को बताया कि वह इस लिहाज से भाग्यशाली रहे कि पैलेट हड्डियों के बेहद करीब नहीं पहुंचे। इसके बावजूद उनके शरीर में 30 से अधिक पैलेट मौजूद होने का दावा किया गया है।
दर्द के बावजूद काम पर लौटे पत्रकार
घायल होने के बाद पत्रकार अब अपने दिल्ली स्थित घर पर हैं। शरीर में पैलेट और दर्द के बावजूद उन्होंने घर से काम करना शुरू कर दिया है।
स्पोर्ट्स पत्रकार होने के कारण वह खेलों की कवरेज से जुड़े हुए हैं और जल्द सामान्य रूप से काम पर लौटना चाहते हैं।
दिल्ली पुलिस कर चुकी है पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप से पहले ही इनकार कर चुकी है।
दूसरी ओर, CRPF ने शुक्रवार को कहा कि वह पैलेट गन के कथित इस्तेमाल से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का सत्यापन कर रही है। 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस के साथ CRPF की विशेष दंगा नियंत्रण इकाई Rapid Action Force (RAF) भी तैनात थी।
ऐसे में अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में पैलेट से जुड़ी चोटों का उल्लेख इस पूरे विवाद में नया और अहम तथ्य बनकर सामने आया है। हालांकि पैलेट किस सुरक्षा बल के कर्मी ने चलाए, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुलिस कार्रवाई पर बढ़ रहे सवाल
20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च के बाद कई प्रदर्शनकारियों ने अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं। CJP ने भी कथित पुलिस कार्रवाई को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बना लिया है।
संगठन ने घोषणा की है कि वह तस्वीरों और वीडियो के जरिए उन पुलिसकर्मियों की पहचान करने की कोशिश करेगा, जिन पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप है। CJP ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी की है।
अब घायल पत्रकार की मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा एजेंसियों पर स्थिति स्पष्ट करने का दबाव और बढ़ सकता है।
फिलहाल एक तरफ दिल्ली पुलिस पैलेट गन चलाए जाने से इनकार कर रही है, दूसरी तरफ CRPF मीडिया रिपोर्टों का सत्यापन कर रही है और अब सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में भी पैलेट से जुड़ी चोटों का उल्लेख सामने आया है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 20 जुलाई को पैलेट गन चली थी तो किसके आदेश पर और किस सुरक्षा बल ने उसका इस्तेमाल किया?




