राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 अक्टूबर 2026
टीवी पत्रकार सुधीर चौधरी के ‘Regime Change Gang’ वाले बयान पर कांग्रेस से जुड़े युवा नेता श्रीनिवास BV ने तीखा जवाब दिया है। सोशल मीडिया पर दोनों के पोस्ट के बीच शुरू हुई यह बहस अब सुधीर चौधरी के पुराने विवाद तक पहुंच गई है। श्रीनिवास ने अपने जवाब में 2012 के चर्चित उगाही मामले का जिक्र करते हुए सुधीर को उनका पुराना दौर याद दिलाया।
‘रेजीम चेंज गैंग’ पर सुधीर का बयान
सुधीर चौधरी ने 20 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर लिखा था कि बाजार में एक नया गैंग आया है, जिसे उन्होंने ‘Regime Change Gang’ नाम दिया। उन्होंने इसे ‘अर्बन नक्सल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का नया रूप बताया।
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीनिवास BV ने कहा कि सब कुछ शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से होगा। उन्होंने DD News के दफ्तर में बैठे लोगों और ‘रावण के दहन’ का जिक्र करते हुए सुधीर चौधरी पर व्यंग्य किया।
सुधीर ने अपने एक अन्य पोस्ट में विजयादशमी का संदर्भ देते हुए कहा था कि सत्ता परिवर्तन का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीका चुनाव है। उन्होंने 2014 में बीजेपी को मिली 44 सीटों का उल्लेख करते हुए राजनीतिक विरोधियों को रावण बताने वाली भाषा पर भी सवाल उठाए थे।
श्रीनिवास ने याद दिलाया 100 करोड़ का विवाद
श्रीनिवास BV ने अपने पलटवार में सुधीर चौधरी के पुराने विवाद का उल्लेख किया। उन्होंने 2012 के मामले, 100 करोड़ रुपये की कथित उगाही और तिहाड़ जेल जाने का जिक्र करते हुए उनके बयान पर निशाना साधा।
यह संदर्भ 2012 में सुधीर चौधरी और एक अन्य पत्रकार के खिलाफ दर्ज जबरन वसूली के मामले से जुड़ा है। उस समय दोनों पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत मिली थी। इस मामले ने उस दौर में मीडिया और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा पैदा की थी।
हालांकि, मामले से जुड़े आरोपों और उनके अंतिम न्यायिक निष्कर्षों के बीच अंतर करना जरूरी है। श्रीनिवास की टिप्पणी एक राजनीतिक पलटवार है; इसे अपने आप में किसी आरोप का न्यायिक रूप से प्रमाणित होना नहीं माना जा सकता।
पत्रकारिता, राजनीति और जवाबदेही
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोग जब दूसरों पर गंभीर आरोप लगाते हैं, तो क्या उन्हें अपने पुराने विवादों पर उठने वाले सवालों का भी सामना नहीं करना चाहिए?
सुधीर चौधरी के ‘Regime Change Gang’ वाले बयान और श्रीनिवास BV के जवाब के बीच बहस केवल दो सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है। यह राजनीतिक विरोध, पत्रकारिता की भूमिका और सार्वजनिक व्यक्तियों की जवाबदेही से भी जुड़ी है।
सवाल यही है: दूसरों की नीयत पर सवाल उठाने वाले सार्वजनिक चेहरे अपने पुराने विवादों पर उठने वाले सवालों का जवाब देने के लिए कितने तैयार हैं?



