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16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन! ब्रिटेन का बड़ा फैसला, TikTok-Instagram पर लग सकती है रोक

टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | लंदन | 13 जून 2026

मोबाइल स्क्रीन में गुम होती नई पीढ़ी पर अब ब्रिटेन की सरकार ने बड़ा प्रहार करने का फैसला कर लिया है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए “हाई रिस्क” सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने जा रही है। प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद लाखों किशोर TikTok, Instagram, Snapchat, X और अन्य सोशल मीडिया ऐप्स से दूर हो सकते हैं।

ब्रिटिश सरकार का तर्क है कि सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर गंभीर असर डाल रहा है। सरकार को मिले 1.16 लाख से अधिक सुझावों में लगभग 90 प्रतिशत अभिभावकों ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का समर्थन किया है।

योजना के तहत केवल प्रतिबंध ही नहीं बल्कि कई कड़े नियंत्रण भी लगाए जाएंगे। 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे अजनबियों से चैट नहीं कर सकेंगे, गायब हो जाने वाले संदेश (Disappearing Messages) नहीं भेज सकेंगे और लाइव स्ट्रीमिंग जैसी सुविधाओं का भी इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इतना ही नहीं, रोमांटिक या यौन प्रकृति वाले AI चैटबॉट्स के उपयोग पर भी 18 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए रोक लगाने की तैयारी है।

ब्रिटेन का यह कदम ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में सोशल मीडिया की लत, साइबर बुलिंग, अश्लील सामग्री और मानसिक स्वास्थ्य संकट को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऑस्ट्रेलिया पहले ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू कर चुका है, जहां TikTok, YouTube, Facebook, Instagram, Snapchat और X जैसे प्लेटफॉर्म प्रभावित हुए हैं।

हालांकि इस फैसले पर विवाद भी शुरू हो गया है। टेक कंपनियां और कुछ कानूनी विशेषज्ञ इसे अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ प्लेटफॉर्म्स को “सुरक्षित” और कुछ को “खतरनाक” घोषित करना कानूनी विवाद को जन्म दे सकता है।

फिर भी ब्रिटिश सरकार का संदेश साफ है—बच्चों की सुरक्षा के मामले में अब टेक कंपनियों की मनमानी नहीं चलेगी। सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियां मुनाफे के लिए बच्चों को स्क्रीन से चिपकाए रखना चाहती हैं, जबकि अभिभावक और समाज इसके दुष्परिणाम भुगत रहे हैं।

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि ब्रिटेन का यह प्रयोग कितना सफल होता है। अगर यह मॉडल कामयाब रहा तो आने वाले वर्षों में कई अन्य देश भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर इसी तरह के कड़े प्रतिबंध लागू कर सकते हैं। डिजिटल युग में यह फैसला बच्चों की ऑनलाइन आज़ादी और उनकी सुरक्षा के बीच संतुलन की नई बहस छेड़ सकता है।

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