राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/मुंबई | 2 नवंबर 2026
NCP में सब कुछ ठीक नहीं?
अजित पवार के निधन के बाद पार्टी की कमान सुनेत्रा पवार के हाथों में है, लेकिन संगठन के भीतर असंतोष लगातार सामने आ रहा है। इसी नाराजगी के बीच रविवार देर रात NCP के छह वरिष्ठ नेताओं ने अमित शाह से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, हसन मुश्रीफ, छगन भुजबल, दिलीप वलसे-पाटिल और धनंजय मुंडे शामिल थे। पूर्व सांसद समीर भुजबल भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।
खास बात यह रही कि इस मुलाकात में पार्टी प्रमुख सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार शामिल नहीं थे। रिपोर्ट के मुताबिक, नेताओं ने पार्टी में सामूहिक नेतृत्व की कमी और संगठन के कामकाज में आ रही दिक्कतों को अमित शाह के सामने रखा।
शाह का संदेश—संगठन संभालिए, वरना महायुति पर पड़ेगा असर
बैठक से जुड़े NCP नेताओं के हवाले से बताया गया है कि अमित शाह ने नेताओं से कहा कि उन्हें अपनी कार्यशैली सुधारनी होगी। पार्टी का संगठन कमजोर हो रहा है और इसका असर केवल NCP तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की महायुति सरकार की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक, शाह ने संकेत दिया कि यदि पार्टी के भीतर के मतभेद और संगठनात्मक समस्याएं दूर नहीं हुईं तो गठबंधन के सामने भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। बीजेपी महाराष्ट्र में NCP के घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रही है।
वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी की कई वजहें
NCP के भीतर असंतोष की वजह केवल नेतृत्व का सवाल नहीं है। कई वरिष्ठ नेता अपने राजनीतिक भविष्य और पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर भी नाराज बताए जा रहे हैं।
छगन भुजबल की नाराजगी की वजह मुंबई NCP अध्यक्ष के रूप में विधान परिषद सदस्य जीशान सिद्दीकी की नियुक्ति बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले से पहले उनसे सलाह नहीं ली गई।
दिलीप वलसे-पाटिल और धनंजय मुंडे मंत्रिमंडल में जगह मिलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि मंत्रिमंडल में पद खाली हैं। वहीं, वित्त मंत्रालय भी विवाद का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। यह विभाग अजित पवार के पास था। उनके निधन के बाद बीजेपी ने इसे अपने पास रख लिया और NCP की बार-बार मांग के बावजूद अब तक वापस नहीं किया है।
हसन मुश्रीफ की नाराजगी की वजह पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव भी बताया जा रहा है। NCP ने यह सीट बीजेपी के लिए छोड़ दी, जिसके बाद मुश्रीफ को अपने करीबी सहयोगी भैय्या माने की उम्मीदवारी वापस लेनी पड़ी।
हालिया MLC चुनावों में हार के बाद पार्टी के भीतर आत्ममंथन की मांग भी तेज हुई है। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे सार्वजनिक रूप से संगठन की समीक्षा की जरूरत जता चुके हैं।
NCP ने मतभेद की खबरों को बताया निराधार
हालांकि, NCP ने अमित शाह के साथ बैठक को पार्टी के अंदरूनी विवाद से जोड़ने वाली खबरों को खारिज किया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कहा कि दिल्ली में हुई मुलाकात को अनावश्यक राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और पार्टी में मतभेद की कहानी गढ़ने की कोशिश हो रही है।
उनके मुताबिक, सुनेत्रा पवार ने अमित शाह के साथ पिछली मुलाकात के दौरान ही वरिष्ठ नेताओं के प्रतिनिधिमंडल की बैठक का सुझाव दिया था और उसी के तहत यह मुलाकात तय हुई थी।
सवाल अब भी कायम हैं
NCP भले ही अंदरूनी मतभेद से इनकार कर रही हो, लेकिन छह वरिष्ठ नेताओं का पार्टी प्रमुख और उनके बेटे के बिना सीधे अमित शाह से मिलना महाराष्ट्र की राजनीति में कई सवाल खड़े करता है। नेतृत्व को लेकर असंतोष, मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी, वित्त मंत्रालय और संगठन पर पकड़ जैसे मुद्दे अब केवल पार्टी के भीतर की चर्चा नहीं रह गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अजित पवार के बाद NCP की कमान किस तरह चलेगी—क्या पार्टी सामूहिक नेतृत्व के साथ आगे बढ़ेगी या फैसले कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहेंगे? और क्या अमित शाह की नसीहत के बाद NCP अपने घर की लड़ाई सुलझा पाएगी?



