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‘मनरेगा बचाओ’ अभियान तेज: कांग्रेस ने की केंद्र से योजना की बहाली और ₹400 न्यूनतम मज़दूरी की मांग

महेंद्र कुमार | नई दिल्ली 11 जनवरी 2026

नई दिल्ली | महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को लेकर सियासत एक बार फिर तेज़ हो गई है। इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) और कांग्रेस पार्टी ने देशभर में ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान छेड़ते हुए केंद्र सरकार से योजना की तत्काल बहाली, समय पर पूरी मज़दूरी भुगतान और काम के संवैधानिक अधिकार की पुनर्स्थापना की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण मज़दूरों के लिए काम की कानूनी गारंटी है।

कांग्रेस और यूथ कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मनरेगा को कमजोर करना सीधे तौर पर रोज़गार, सम्मान और गांवों के अधिकारों पर हमला है। सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट और प्रचार सामग्री में कहा गया है कि भुगतान में देरी, काम के दिन घटने और जवाबदेही की कमी से ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

1. कांग्रेस ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा है—

2. काम का कानूनी अधिकार सुरक्षित रहे

3. हर काम की पूरी मज़दूरी, समय पर मिले

4. बकाया और देरी से भुगतान के लिए जवाबदेही तय हो

5. पंचायतों के अधिकार मज़बूत और बहाल किए जाएं

6. VB-GRAM-G जैसे प्रावधान तुरंत वापस लिए जाएं

7. देशभर में ₹400 न्यूनतम दैनिक मज़दूरी लागू हो

‘संविधान से मिला अधिकार’, जुड़ने की अपील

पार्टी नेताओं का कहना है कि मनरेगा संविधान की भावना के अनुरूप ग्रामीण भारत को सुरक्षा देता है। “काम का अधिकार संविधान से मिला है, और मनरेगा की बहाली से ही यह अधिकार बचेगा,” अभियान में कहा गया। कांग्रेस ने यह भी जोड़ा कि ₹400 की अखिल भारतीय न्यूनतम मज़दूरी ग्रामीण परिवारों को गरिमा और स्थिर आजीविका देने के लिए ज़रूरी है। कांग्रेस, इंडियन यूथ कांग्रेस और महिला कांग्रेस ने लोगों से अभियान से जुड़ने की अपील की है। इसके लिए mgnregabachao.in वेबसाइट, मिस्ड कॉल और QR कोड के ज़रिए समर्थन जुटाया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं, बल्कि ग्रामीण मज़दूरों के हक़ की है। मनरेगा को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और तेज़ होने के संकेत दे रहा है।

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