Home » National » मोदी-बादल मुलाकात से पंजाब की राजनीति में हलचल, क्या फिर साथ आएंगे BJP और अकाली दल?

मोदी-बादल मुलाकात से पंजाब की राजनीति में हलचल, क्या फिर साथ आएंगे BJP और अकाली दल?

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/चंडीगढ़ | 8 अगस्त 2026

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक के बाद वर्षों पुराने SAD-BJP गठबंधन की वापसी की अटकलों ने फिर जोर पकड़ लिया है। हालांकि दोनों दलों ने बैठक के एजेंडे पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भविष्य के चुनावी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, सुखबीर बादल ने संसद भवन परिसर स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बैठक कितनी देर चली और किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई। लेकिन पंजाब की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है।

शिरोमणि अकाली दल और भाजपा करीब ढाई दशक तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे। दोनों दलों का गठबंधन 2020 में तीन कृषि कानूनों के विरोध के दौरान टूट गया था। अकाली दल ने केंद्र सरकार से नाता तोड़ते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) छोड़ दिया था। इसके बाद 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव दोनों दलों ने अलग-अलग लड़े।

अब बदलते राजनीतिक हालात में दोनों दलों के फिर करीब आने की चर्चा शुरू हो गई है। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार, कांग्रेस की सक्रियता और बदलते चुनावी समीकरणों के बीच भाजपा और अकाली दल दोनों नए राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में पुराना गठबंधन दोनों दलों के लिए रणनीतिक रूप से लाभकारी माना जा रहा है।

हालांकि अकाली दल के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने गठबंधन की अटकलों पर सीधे तौर पर कुछ भी कहने से इनकार किया। उन्होंने केवल इतना कहा कि, “नेताओं की मुलाकात हुई है, फिलहाल इससे अधिक कुछ कहना उचित नहीं होगा।” भाजपा की ओर से भी बैठक को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों दल फिर साथ आते हैं तो पंजाब की चुनावी तस्वीर बदल सकती है। अकाली दल के पास ग्रामीण और सिख वोट बैंक का अनुभव है, जबकि भाजपा शहरी क्षेत्रों में अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दलों का गठबंधन विपक्षी राजनीति में नया समीकरण बना सकता है।

फिलहाल न तो भाजपा और न ही अकाली दल ने गठबंधन की पुष्टि की है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि पंजाब की राजनीति में पुराने सहयोगियों के बीच संवाद फिर शुरू हो चुका है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह बातचीत केवल शिष्टाचार तक सीमित रहती है या 2027 के चुनाव से पहले दोनों दल एक बार फिर साथ आने का औपचारिक ऐलान करते हैं।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted