राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 8 अगस्त 2026
छात्र आंदोलन और सरकार विरोधी सामग्री को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram एक बार फिर विवादों में है। आरोप है कि Meta के स्वामित्व वाले इस प्लेटफॉर्म ने भारत में कई राजनीतिक नेताओं, विपक्षी दलों, छात्र आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और मीडिया संस्थानों की पोस्ट तथा रील्स को ब्लॉक करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब Meta के वरिष्ठ अधिकारियों और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की बैठकें हुई हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंडियन यूथ कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, Cockroach Janta Party (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास और समाचार पोर्टल Scroll.in सहित कई खातों की पोस्ट भारत में दिखाई नहीं दे रही हैं। कई उपयोगकर्ताओं को संदेश मिला कि संबंधित सामग्री आईटी नियम, 2021 (IT Rules, 2021) के तहत भारत में उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
बताया जा रहा है कि सरकार ने हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी सामग्री के तेजी से प्रसार को गंभीरता से लिया है। इसी संदर्भ में Meta से उसके रिकमेंडेशन एल्गोरिदम और कंटेंट वितरण प्रणाली को लेकर भी सवाल पूछे गए। सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए विरोध प्रदर्शनों को व्यापक पहुंच मिली।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में Meta ने ऐसी सामग्री भी ब्लॉक की है, जिसे हटाने के लिए उस पर कोई कानूनी बाध्यता स्पष्ट रूप से नहीं थी। यदि यह दावा सही है, तो इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल प्लेटफॉर्म की निष्पक्षता को लेकर नए सवाल खड़े हो सकते हैं। हालांकि Meta की ओर से इस संबंध में विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकार ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों से कानून का पालन और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपेक्षा करती है, वहीं दूसरी ओर नागरिक अधिकार समूह और विपक्षी दलों का कहना है कि राजनीतिक विचारों और विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी सामग्री पर अत्यधिक रोक लोकतांत्रिक विमर्श को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित पोस्ट किन विशिष्ट सरकारी आदेशों या कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर ब्लॉक की गईं। लेकिन इतना तय है कि छात्र आंदोलनों और राजनीतिक कंटेंट पर बढ़ती निगरानी के बीच Meta की कार्रवाई अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई है।




