खेल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 अक्टूबर 2026
क्रिस्टियानो रोनाल्डो और पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम के बीच कहानी इस वक्त किसी फुटबॉल मैच से ज्यादा दिलचस्प हो गई है। 41 साल के रोनाल्डो ने टीम से बाहर होने के बाद जिस अंदाज में कैंप छोड़ा, उससे लगा कि शायद पुर्तगाल के साथ उनका अंतरराष्ट्रीय सफर अब खत्म हो गया। लेकिन कोच जॉर्ज जीसस ने रविवार को ऐसा बयान दे दिया जिसने पूरी कहानी पलट दी। उन्होंने साफ कहा—रोनाल्डो अगर वापस आना चाहते हैं तो उनके लिए राष्ट्रीय टीम का दरवाजा खुला है। यानी गेंद अब कोच के नहीं, खुद रोनाल्डो के पाले में है।
मामला शुरू हुआ टीम में रोनाल्डो की भूमिका को लेकर। वेल्स के खिलाफ 24 सितंबर के नेशंस लीग मुकाबले में रोनाल्डो को मैदान से बाहर बुला लिया गया। इसके बाद नॉर्वे के खिलाफ 27 सितंबर के मुकाबले में वह पूरी तरह बेंच पर बैठे रहे। फिर डेनमार्क के खिलाफ अगले मुकाबले में जब उन्हें दोबारा शुरुआती एकादश से बाहर रहने की जानकारी मिली तो रोनाल्डो ने इंतजार करना पसंद नहीं किया। उन्होंने निजी विमान लिया और सीधे सऊदी अरब लौट गए। एक तरफ दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल सितारों में शामिल खिलाड़ी कैंप छोड़कर चले गए, दूसरी तरफ पुर्तगाल की टीम मैदान पर उतरती रही। अचानक सवाल खड़ा हो गया—क्या रोनाल्डो का पुर्तगाल अध्याय खत्म?
लेकिन फुटबॉल में कहानी कभी इतनी सीधी नहीं होती। रोनाल्डो के बिना पुर्तगाल ने नॉर्वे को 2-1 से हराकर नेशंस लीग के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली टीम बनने का कमाल कर दिया। गोंकालो रामोस ने 86वें मिनट में निर्णायक गोल किया, जबकि जोआओ कैंसेलो ने बराबरी का गोल दागा। यानी जिस टीम को रोनाल्डो के बिना लेकर सवाल उठ रहे थे, उसने मैदान पर जवाब दे दिया। लेकिन इसके बावजूद कोच जॉर्ज जीसस रोनाल्डो के लिए दरवाजा बंद करने के मूड में नहीं हैं।
जीसस ने कहा कि अगर रोनाल्डो अल-नस्र के लिए खेलते रहे और खुद राष्ट्रीय टीम में लौटना चाहें तो उन्हें अगली टीम में बुलाया जा सकता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि कोच ने फैसला अपने हाथ में रखने के बजाय रोनाल्डो के हाथ में डाल दिया। उनका संदेश साफ है—“लौटना है तो फैसला तुम्हारा है।” जीसस ने यहां तक कहा कि उन्होंने अपनी पहली कॉल-अप के समय रोनाल्डो से कहा था कि उन्हें उनकी जरूरत है, चाहे वह खेलें या न खेलें। यानी मैदान पर उनकी भूमिका बदले तो भी टीम में उनका महत्व खत्म नहीं हुआ है।
रोनाल्डो के लिए यह सिर्फ एक और चयन विवाद नहीं है। वह पुर्तगाल के सबसे ज्यादा गोल करने वाले और सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ियों में शीर्ष पर हैं। 2003 में 18 साल की उम्र में राष्ट्रीय टीम में पदार्पण करने वाला यह खिलाड़ी छह विश्व कप खेल चुका है और दो दशक से ज्यादा समय से पुर्तगाल की पहचान बना हुआ है। खुद रोनाल्डो भी संकेत दे चुके हैं कि उनका फुटबॉल करियर शायद अब आखिरी दौर में है। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं कि वह अगला मैच खेलेंगे या नहीं। सवाल यह है कि क्या दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल सितारों में से एक अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच अपनी शर्तों पर खेलना चाहता है?
इस बीच टीम के कप्तान ब्रूनो फर्नांडिस ने भी विवाद को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने रोनाल्डो को पुर्तगाल के महानतम खिलाड़ियों में से एक बताते हुए कहा कि उन्हें सम्मान मिलना चाहिए और देश को इस मुद्दे पर बंटना नहीं चाहिए। फर्नांडिस का संदेश साफ था—टीम में कोई गुटबाजी नहीं है और बाहर की चर्चाओं को ड्रेसिंग रूम की हकीकत नहीं माना जाना चाहिए।
अब कहानी का अगला अध्याय नवंबर में लिखा जाएगा। पुर्तगाल 14 नवंबर को डेनमार्क की मेजबानी करेगा और 17 नवंबर को वेल्स के खिलाफ खेलेगा। अगर रोनाल्डो लौटते हैं तो यह वापसी सिर्फ एक खिलाड़ी की वापसी नहीं होगी, बल्कि पुर्तगाल के एक युग की कहानी का अगला अध्याय होगी। और अगर वह नहीं लौटते, तो नॉर्वे के खिलाफ मिली जीत को लोग शायद उस दिन के रूप में याद करेंगे जब पुर्तगाल ने पहली बार यह दिखाया कि रोनाल्डो के बिना भी वह जीत सकता है—लेकिन रोनाल्डो को अब भी वह खोना नहीं चाहता।



