स्पोर्ट्स | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 अक्टूबर 2026
मोहम्मद शमी अभी घरेलू क्रिकेट में गेंद से अपना काम कर रहे हैं, लेकिन टीम इंडिया में उनकी वापसी की उम्मीदों पर सवाल लगातार गहरे होते जा रहे हैं। अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर दिनेश कार्तिक ने शमी को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने इस बहस को और गरमा दिया है। कार्तिक का सीधा कहना है कि भारतीय टीम शमी से आगे निकल चुकी है और अब उन्हें वापस लाने का कोई मतलब नहीं है। यानी गेंदबाज मैदान पर प्रदर्शन करता रहे, लेकिन चयन की तस्वीर में उसके लिए जगह अब दिखाई नहीं दे रही। यह बयान ऐसे समय आया है जब वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में भारत के गेंदबाजों का प्रदर्शन सवालों के घेरे में रहा और तीसरे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने भारत के 351 रन के विशाल स्कोर को भी 48.2 ओवर में पांच विकेट से हासिल कर लिया।
शमी का मामला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि भारतीय क्रिकेट में वह कोई प्रयोग या भविष्य की संभावना नहीं, बल्कि लंबे समय तक टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाजों में रहे हैं। नई गेंद हो या पुरानी, टेस्ट हो या वनडे, शमी ने कई मौकों पर भारतीय गेंदबाजी को मैच जिताने की क्षमता दिखाई है। लेकिन उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2025 में आया और उसके बाद से उनकी वापसी लगातार टलती रही। कभी फिटनेस का सवाल, कभी चोट, कभी चयनकर्ताओं की पसंद—कारण बदलते रहे और शमी टीम से दूर होते गए। दूसरी तरफ घरेलू क्रिकेट में वह लगातार खुद को साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में जब उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखने वाली टीम खुद गेंदबाजी में संघर्ष करती दिखाई देती है, तब यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या चयनकर्ताओं ने शमी के लिए पहले ही फैसला कर लिया है?
दिनेश कार्तिक ने इसी सवाल का जवाब लगभग साफ शब्दों में दे दिया। शमी की वापसी को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि टीम इंडिया उनसे आगे बढ़ चुकी है। कार्तिक ने माना कि शमी ने अच्छी गेंदबाजी की है, लेकिन उनके मुताबिक भारत के पास अब दूसरे तेज गेंदबाज मौजूद हैं। अर्शदीप सिंह, मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे नाम टीम की मौजूदा योजनाओं का हिस्सा हैं, जबकि गुरनूर बराड़, अकीब नबी और अंशुल कंबोज जैसे युवा गेंदबाजों को भी धीरे-धीरे मौके दिए जा रहे हैं। यही भारतीय क्रिकेट का नया रास्ता बताया जा रहा है—अनुभव की जगह युवा विकल्पों को तैयार करना। लेकिन यहां असली सवाल यह है कि क्या बदलाव का मतलब पुराने मैच विजेता को पूरी तरह भुला देना है?
वेस्टइंडीज के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज ने इस बहस को और गंभीर बना दिया है। भारत ने सीरीज 2-1 से जरूर जीती, लेकिन गेंदबाजों ने कई मौकों पर कप्तान और टीम प्रबंधन को परेशान किया। तीसरे वनडे में भारत ने 50 ओवर में 351 रन बनाए, फिर भी वेस्टइंडीज ने लक्ष्य को पांच विकेट बाकी रहते हासिल कर लिया। बल्लेबाजों ने अपना काम किया, लेकिन गेंदबाज विपक्षी बल्लेबाजों पर वह दबाव नहीं बना पाए जिसकी जरूरत इतनी बड़ी पारी के बाद थी। ऐसे में सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों तक एक सवाल उठना स्वाभाविक है—अगर टीम की गेंदबाजी परेशानी में है और शमी घरेलू क्रिकेट में उपलब्ध हैं, तो उनकी वापसी पर विचार क्यों नहीं किया जा रहा?
कार्तिक की राय हालांकि सिर्फ शमी तक सीमित नहीं है। उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों के मामले में बिल्कुल अलग रुख अपनाया है। उनका मानना है कि इन दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कार्तिक ने कहा कि अगर ये दो बड़े नाम अगले विश्व कप के बाद वनडे क्रिकेट से विदा लेते हैं तो इसका असर सिर्फ भारतीय टीम पर नहीं, बल्कि पूरे वनडे क्रिकेट पर पड़ सकता है। यानी अनुभव हर खिलाड़ी के लिए बोझ नहीं है। कुछ खिलाड़ियों का अनुभव टीम की जरूरत बन जाता है। फिर सवाल यही है कि शमी के मामले में यह कसौटी अलग क्यों दिखाई दे रही है?
क्रिकेट में चयन सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, लेकिन आंकड़ों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। शमी अगर फिट हैं, घरेलू क्रिकेट में गेंदबाजी कर रहे हैं और टीम की गेंदबाजी में लगातार कमियां दिखाई दे रही हैं, तो उनकी वापसी पर चर्चा होना स्वाभाविक है। उन्हें टीम में रखना जरूरी है या नहीं, इसका अंतिम फैसला चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन को करना है। लेकिन “अब लौटने का कोई मतलब नहीं” जैसी राय यह संकेत जरूर देती है कि भारतीय क्रिकेट में शमी के लिए दरवाजा धीरे-धीरे बंद किया जा रहा है। सवाल यह नहीं कि शमी को हर हाल में वापस बुलाया जाए; सवाल यह है कि क्या एक अनुभवी मैच विजेता को विदा करने से पहले उसे एक आखिरी मौका भी नहीं मिलना चाहिए?



