राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 जून 2026
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार की कथित भूमि खरीद को लेकर उठे विवाद के बीच कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए राजनीतिक जवाबदेही और नैतिकता का मुद्दा उठाया है। पार्टी का दावा है कि भारतीय राजनीति में यदि किसी दल ने भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर अपने नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की परंपरा स्थापित की है, तो वह कांग्रेस है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मोहन यादव भूमि विवाद को “शेयर बाजार की भाषा में इनसाइडर ट्रेडिंग जैसा मामला” बताते हुए कहा कि सत्ता से जुड़े लोगों पर गंभीर सवाल उठने पर नैतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जब केवल आरोपों और नैतिक दबाव के आधार पर भी बड़े नेताओं को पद छोड़ना पड़ा।
कांग्रेस ने गिनाए तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के उदाहरण
कांग्रेस ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पार्टी ने भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के चलते तीन मुख्यमंत्रियों से इस्तीफा लिया।
1964 – प्रताप सिंह कैरो (पंजाब):
दास आयोग की रिपोर्ट में भाई-भतीजावाद और पद के दुरुपयोग के आरोपों को सही पाए जाने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा।
1982 – ए.आर. अंतुले (महाराष्ट्र):
इंदिरा गांधी प्रतिभा प्रतिष्ठान ट्रस्ट के लिए कथित रूप से बिल्डरों से धन उगाही और चर्चित सीमेंट घोटाले के आरोपों के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया।
2010 – अशोक चव्हाण (महाराष्ट्र):
आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में नाम आने और रिश्तेदारों को फ्लैट आवंटन के आरोपों के बाद कांग्रेस नेतृत्व के निर्देश पर पद छोड़ना पड़ा।
केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफों का भी किया उल्लेख
कांग्रेस ने उन केंद्रीय मंत्रियों की सूची भी सामने रखी जिन्होंने विभिन्न विवादों और आरोपों के बाद अपने पद छोड़े।
1958 – टी.टी. कृष्णमाचारी (वित्त मंत्री):
एलआईसी-मूंदड़ा कांड के बाद इस्तीफा दिया।
1963 – के.डी. मालवीय (खान एवं ईंधन मंत्री):
निजी कंपनी से धन लेने के आरोपों के बाद पद छोड़ा।
1996 – सुखराम (संचार मंत्री):
टेलीकॉम घोटाले और सीबीआई छापों में नकदी बरामद होने के बाद इस्तीफा दिया।
2010 – ए. राजा (दूरसंचार मंत्री):
2जी स्पेक्ट्रम आवंटन विवाद के बाद पद छोड़ा। कांग्रेस का दावा है कि बाद में आरोप न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए।
2011 – दयानिधि मारन (कपड़ा मंत्री):
एयरसेल-मैक्सिस सौदे को लेकर विवादों के बाद इस्तीफा दिया।
2012 – वीरभद्र सिंह (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री):
भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में आरोप तय होने के बाद पद छोड़ा।
2013 – पवन कुमार बंसल (रेल मंत्री):
रेलवे बोर्ड नियुक्ति एवं कथित रिश्वत प्रकरण के बाद इस्तीफा दिया।
2013 – अश्विनी कुमार (कानून मंत्री):
कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सीबीआई रिपोर्ट को लेकर विवाद के बाद पद छोड़ा। कांग्रेस का कहना है कि बाद में आरोप साबित नहीं हुए।
मोहन यादव विवाद पर कांग्रेस का हमला
कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार ने उन क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी जहां बाद में सड़क, हाईवे और सिंहस्थ-2028 से जुड़ी विकास परियोजनाएं प्रस्तावित हुईं। पार्टी इसे हितों के टकराव और सत्ता से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के संभावित दुरुपयोग का मामला बता रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और पारदर्शिता बनाए रखनी है तो सत्ता में बैठे लोगों को सबसे ऊंचे मानकों पर परखा जाना चाहिए। पार्टी ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने तथा भूमि खरीद और विकास परियोजनाओं की समय-सीमा सार्वजनिक करने की मांग की है।
हालांकि भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक साजिश और निराधार बता चुकी है। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और सभी संपत्तियां वैधानिक रूप से घोषित हैं।
मोहन यादव भूमि विवाद अब केवल जमीन खरीद का मामला नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक नैतिकता, जवाबदेही और सत्ता में पारदर्शिता की राष्ट्रीय बहस का विषय बनता जा रहा है।




