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छात्रों पर पुलिस बर्बरता को लेकर राहुल का अमित शाह को अल्टीमेटम—‘जवाब तो देना होगा’

जंतर-मंतर प्रदर्शन फिर बना सियासी मुद्दा; राहुल गांधी ने पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर आंसू गैस, वाटर कैनन लाठी चार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल पर गृह मंत्री से मांगा जवाब, बिहार में AK 47 के इस्तेमाल पर भी नाराजगी

राष्ट्रीय/राजनीति/शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | 10 अगस्त 2026

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा है कि छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता का जवाब सरकार को देना ही होगा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ लाठी और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छात्र अपने भविष्य से जुड़े गंभीर सवालों को लेकर सड़क पर उतरे थे, तो उनके साथ ऐसी कार्रवाई क्यों की गई और गृह मंत्री अब तक इस मामले पर खुलकर क्यों नहीं बोले हैं। राहुल ने कहा कि आंदोलन खत्म हो जाने के बाद भी यह मामला खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि छात्रों के साथ हुई कार्रवाई और उसकी जवाबदेही का सवाल अब भी कायम है।

‘अमित शाह को जवाब तो देना होगा’

प्रयागराज में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से बातचीत करते हुए जंतर-मंतर की घटना का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को “जल्द या देर से” जवाब देना पड़ेगा। राहुल गांधी का कहना था कि युवा अपने अधिकार और भविष्य की सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहे थे। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी उनकी बात सुनने और उनकी शिकायतों का समाधान करने की है। विपक्ष के नेता ने पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाबदेही की मांग करते हुए संकेत दिया कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर और जोर से उठाया जा सकता है।

पेपर लीक ने युवाओं के भविष्य पर खड़ा किया सवाल

छात्रों का आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा या एक घटना तक सीमित नहीं था। प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं का मुद्दा लंबे समय से युवाओं की चिंता का कारण बना हुआ है। एक छात्र कई वर्षों तक सरकारी नौकरी की तैयारी करता है। परिवार अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार उसकी पढ़ाई पर खर्च करता है और युवा अपना समय, मेहनत और उम्र इस उम्मीद में लगाता है कि एक निष्पक्ष परीक्षा के जरिए उसे आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। ऐसे में अगर परीक्षा की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो जाएं तो उसका असर केवल एक परिणाम पर नहीं, बल्कि पूरे भविष्य पर पड़ता है।

यही कारण है कि पेपर लीक के खिलाफ होने वाले आंदोलनों में छात्रों की नाराजगी लगातार दिखाई देती है। उनका सवाल सीधा है—अगर परीक्षा में मेहनत करने वाला छात्र और कथित तौर पर नकल या पेपर लीक का फायदा उठाने वाला व्यक्ति एक ही दौड़ में खड़ा हो जाए, तो निष्पक्षता कहां बचेगी? सरकारों के लिए यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि युवाओं का भरोसा केवल नौकरी देने से नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया को ईमानदार और पारदर्शी रखने से बनता है।

लाठी और पैलेट गन के आरोपों ने बढ़ाई गंभीरता

जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई को लेकर लगाए गए लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने का अधिकार है, लेकिन सवाल यह है कि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किन परिस्थितियों में किया गया और क्या इस्तेमाल किया गया बल आवश्यक और अनुपातिक था।

इन आरोपों की निष्पक्ष जांच इसलिए जरूरी है ताकि पूरा घटनाक्रम सामने आ सके। अगर पुलिस ने नियमों के तहत कार्रवाई की थी तो सरकार को तथ्य सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि जांच में जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। लोकतंत्र में पुलिस की शक्ति के साथ जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

सवाल छात्रों के प्रदर्शन के अधिकार का भी

इस पूरे विवाद का एक बड़ा पहलू शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति के अधिकार से जुड़ा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्र और युवा अपनी समस्याओं को लेकर सरकार के सामने आवाज उठा सकते हैं। विरोध का अधिकार कानून-व्यवस्था की सीमाओं के भीतर इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन सरकार और प्रशासन की भी जिम्मेदारी है कि असहमति की आवाज को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में न देखा जाए।

अगर छात्रों को लगता है कि उनकी परीक्षा में अनियमितता हुई है, उनका परिणाम प्रभावित हुआ है या भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है, तो उनकी शिकायत सुनने के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। संवाद की जगह टकराव बढ़ने पर समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि अविश्वास और गहरा होता है।

गृह मंत्रालय की भूमिका पर उठे सवाल

दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है। इसलिए जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री से जवाब मांगना विपक्ष की राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। राहुल गांधी ने इसी प्रशासनिक जवाबदेही को निशाने पर लेते हुए अमित शाह से स्पष्टीकरण की मांग की है।

हालांकि, पुलिस कार्रवाई को लेकर लगे आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। राजनीतिक आरोप अपनी जगह हैं, लेकिन घटना की वास्तविक तस्वीर सामने लाने के लिए उपलब्ध वीडियो, पुलिस रिकॉर्ड, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच जरूरी होगी।

छात्र आंदोलन खत्म हुआ, सवाल नहीं

छात्रों ने अपना आंदोलन भले ही समाप्त कर दिया हो, लेकिन इससे उनकी शिकायतें खत्म नहीं हो जातीं। पेपर लीक, परीक्षा की पारदर्शिता, भर्ती प्रक्रिया में देरी और पुलिस कार्रवाई जैसे सवाल अब भी सरकार के सामने हैं। छात्रों को यह भरोसा चाहिए कि उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी और अगर किसी स्तर पर अनियमितता साबित होती है तो दोषियों पर कार्रवाई होगी।

यही वजह है कि राहुल गांधी ने आंदोलन खत्म होने के बाद भी इस मुद्दे को उठाया है। उनका कहना है कि छात्रों के साथ जो हुआ, उसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है। विपक्ष इस मुद्दे को सरकार पर दबाव बनाने के लिए आगे भी इस्तेमाल कर सकता है।

मामला सिर्फ पुलिस कार्रवाई का नहीं, युवाओं के भरोसे का है

जंतर-मंतर की घटना ने देश के सामने इससे बड़ा सवाल रखा है कि सरकार और युवाओं के बीच संवाद कितना मजबूत है। आज का युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की लंबी प्रक्रिया, सीमित सरकारी नौकरियों, परीक्षा में देरी और कथित पेपर लीक जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। जब वह इन मुद्दों को लेकर सड़क पर आता है, तो उसकी बात सुनना लोकतांत्रिक सरकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।

किसी भी सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण उसकी नीतियों से ज्यादा जनता का भरोसा होता है। खासकर युवाओं का भरोसा। अगर छात्रों को यह महसूस होने लगे कि सवाल पूछने पर उन्हें सुना नहीं जाएगा और विरोध करने पर उनके खिलाफ बल प्रयोग होगा, तो यह केवल एक आंदोलन की समस्या नहीं रह जाती। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में भरोसे का सवाल बन जाता है।

राहुल गांधी ने इसी मुद्दे पर अमित शाह को घेरा है और कहा है कि छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता का जवाब देना होगा। अब निगाहें केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के अगले कदम पर हैं—क्या सरकार इस मामले पर विस्तृत जवाब देगी, क्या कार्रवाई की स्वतंत्र जांच होगी और क्या छात्रों की मूल शिकायतों पर कोई ठोस समाधान सामने आएगा? फिलहाल इतना साफ है कि जंतर-मंतर का छात्र आंदोलन भले थम गया हो, लेकिन छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई का राजनीतिक विवाद अभी थमा नहीं है।

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