राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 26 सितंबर 2026
‘NARENDRA MODI MUST RESIGN’—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग के साथ कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर अपने आंदोलन को देशव्यापी रूप दे दिया है। राहुल गांधी के 24 सितंबर के तीखे हमले के बाद 25 सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ता दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़, जयपुर, भोपाल, लखनऊ, गुवाहाटी, देहरादून, जम्मू, कोलकाता और कई अन्य शहरों में सड़कों पर उतरे। आंदोलन का निशाना केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार रहे। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के गिरफ्तारी की मांग की।
24 सितंबर को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी व्यवस्था पर बेहद कड़ा प्रहार किया था। उन्होंने कहा कि देश के चुनाव “fundamentally broken” हैं और ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए। राहुल गांधी ने अपने आरोपों को “वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी” के रूप में पेश किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों की जांच की मांग करते हुए कहा कि अब सवाल सिर्फ एक चुनाव या एक राज्य का नहीं, बल्कि पूरी चुनावी व्यवस्था का है।
राहुल गांधी का यह हमला उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ जिसमें निर्वाचन आयोग के भीतर SIR को लेकर गंभीर मतभेद सामने आने की बात कही गई। Indian Express की जांच के अनुसार निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार अलग-अलग फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, पश्चिम बंगाल की अपीलों, Form 6 में बदलाव और मतदाता सूची के IT डाटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
कांग्रेस ने अब इन्हीं सवालों को लेकर आंदोलन को सड़कों तक पहुंचा दिया है। पार्टी ने अपने प्रदेश संगठनों को चुनाव कार्यालयों की ओर मार्च करने और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाने का आह्वान किया। दिल्ली से लेकर पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर तक प्रदर्शन हुए। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने चुनाव कार्यालयों की ओर मार्च किया और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग तथा पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।
चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस ने सीधे ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग की। पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने SIR से जुड़े फैसलों और निर्वाचन आयोग के भीतर सामने आई असहमति को लेकर कार्रवाई की मांग की। कोलकाता में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग वाले पोस्टर और नारे लगाए।
गुवाहाटी में असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत कई कांग्रेस नेताओं को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया। कांग्रेस कार्यकर्ता निर्वाचन कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। वहीं दिल्ली में भी कांग्रेस और Youth Congress के कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग की ओर मार्च करने की कोशिश की।
अब आंदोलन का सवाल सिर्फ “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें” तक सीमित नहीं है। कांग्रेस के कई प्रदर्शनकारियों और नेताओं की मांग में गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई भी शामिल हो गई है। INDIA bloc के भीतर भी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग तेज हुई है। विपक्षी दल संसद में उनके खिलाफ हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की बात भी सामने ला चुके हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ SIR और मतदाता सूची में हुए बड़े बदलावों से जुड़े सवाल हैं। विपक्ष का कहना है कि जब निर्वाचन आयोग के भीतर ही महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज हुईं, तो उन फैसलों की प्रक्रिया, अधिकार और जिम्मेदारी सार्वजनिक होनी चाहिए। सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से बाहर होता है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी और उस नागरिक के मतदान के अधिकार की भरपाई कैसे होगी।
कांग्रेस ने इस आंदोलन में युवाओं और Gen Z को भी जोड़ने की कोशिश की है। पार्टी नेताओं ने नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को युवाओं के मतदान अधिकार से जोड़ा है। राहुल गांधी के समर्थक सोशल मीडिया पर उनके अभियान को लोकतंत्र और मतदान के अधिकार की लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया संदेशों या पार्टी प्रदर्शनों को अपने आप में पूरे देश के जनमत का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
राहुल गांधी के अभियान में अब एक और बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आ रहा है—अगर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल हैं तो जवाब सिर्फ CEC के इस्तीफे से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा होना चाहिए। इसी वजह से ‘वोट चोरी’ का मुद्दा कांग्रेस के आंदोलन में केंद्र में बना हुआ है और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ उनकी गिरफ्तारी की मांग भी कई स्थानों पर उठाई जा रही है।
कांग्रेस के इस आंदोलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे का नारा भी प्रमुखता से सामने आया है। ‘NARENDRA MODI MUST RESIGN’ को पार्टी समर्थक चुनावी व्यवस्था को लेकर अपने व्यापक राजनीतिक अभियान से जोड़ रहे हैं। राहुल गांधी के संदेश में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, चुनाव आयोग और SIR से जुड़े सवाल एक ही राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गए हैं।
अब सड़क पर नारे तेज हैं, चुनावी व्यवस्था पर सवाल तेज हैं और विपक्ष की कार्रवाई की मांग भी तेज हो गई है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से लेकर उनकी गिरफ्तारी तक, और ‘वोट चोरी’ से लेकर ‘नरेंद्र मोदी इस्तीफा दो’ तक—कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल दिया है। अगले चरण में यह आंदोलन संसद, अदालत और चुनावी संस्थाओं के सामने किस रूप में आगे बढ़ता है, यही इस पूरे विवाद की अगली बड़ी तस्वीर तय करेगा।



