राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 नवंबर 2026
राहुल गांधी ने पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) को बीजेपी और RSS की ‘बी टीम’ बताते हुए उसके राजनीतिक रवैये पर सवाल उठाए। इसके बाद कॉकroach जनता पार्टी (CJP) ने अपने अगले प्रदर्शन के लिए कांग्रेस शासित केरल को चुना है। 7 नवंबर को कोच्चि में होने जा रहे इस प्रदर्शन ने एक बार फिर CJP और AAP के राजनीतिक रिश्तों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि CJP कहां प्रदर्शन कर रही है। बड़ा सवाल यह है कि जब विपक्ष को बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है, तब CJP कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के साझा मंच से दूरी क्यों बनाए रखती है? उसकी राजनीतिक गतिविधियां विपक्ष की एकजुटता को मजबूत कर रही हैं या विपक्षी खेमे में अलगाव बढ़ा रही हैं?
राहुल गांधी ने साथ आने का न्योता दिया, CJP ने दूरी बनाए रखी
CJP के रवैये को समझने के लिए अक्टूबर की घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है। दिल्ली में CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राहुल गांधी ने खुलकर उनके समर्थन में आवाज उठाई। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं को जेल में रखने पर सवाल उठाया और कहा कि अलग-अलग बैनर के बावजूद सभी प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई का हिस्सा हैं।
राहुल गांधी ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को INDIA ब्लॉक के नेताओं और नागरिक संगठनों के साथ अपने आवास पर आयोजित हाई-टी में शामिल होने का न्योता भी दिया। कांग्रेस की ओर से यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि पार्टी के भीतर CJP को लेकर पहले से संदेह रहा था। इसके बावजूद राहुल गांधी ने CJP को विपक्ष के व्यापक संघर्ष का हिस्सा बनाने की कोशिश की। लेकिन दीपके उस बैठक में शामिल नहीं हुए।
कांग्रेस से दूरी, AAP और वाम दलों के साथ सक्रियता
10 अक्टूबर को CJP ने दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आयोजन किया था। इस प्रदर्शन में AAP और वाम दलों ने समर्थन दिया, जबकि कांग्रेस इससे दूर रही और अपने अलग कार्यक्रम में व्यस्त रही। CJP के कार्यक्रम में विपक्षी दलों के बीच यह अंतर साफ दिखाई दिया।
इसके बाद भी CJP और कांग्रेस के बीच कोई औपचारिक साझा राजनीतिक मंच नहीं बना। CJP ने 1 नवंबर की INDIA ब्लॉक रैली को समर्थन देने का बयान जरूर जारी किया, लेकिन उसके नेतृत्व ने रैली में शामिल होकर विपक्ष के साथ मंच साझा नहीं किया। इस तरह समर्थन के बयान और वास्तविक राजनीतिक भागीदारी के बीच अंतर बना रहा।
AAP से दीपके का पुराना रिश्ता
CJP और AAP के बीच संबंधों की चर्चा का एक महत्वपूर्ण आधार अभिजीत दीपके की राजनीतिक पृष्ठभूमि है। दीपके 2020 से 2023 तक AAP की सोशल मीडिया और चुनावी प्रचार गतिविधियों से जुड़े रहे। बाद में उन्होंने CJP की स्थापना की और उसे एक स्वतंत्र युवा संगठन के रूप में पेश किया।
AAP ने CJP के आंदोलनों को सार्वजनिक समर्थन भी दिया है। अक्टूबर में CJP नेताओं की हिरासत के दौरान अरविंद केजरीवाल ने उनकी रिहाई का मुद्दा उठाया था। CJP के प्रदर्शन में AAP की भागीदारी और दोनों के बीच सार्वजनिक समर्थन का यह सिलसिला राजनीतिक सवालों को और गंभीर बनाता है।
AAP और CJP की राजनीति से विपक्ष को क्या नुकसान?
विपक्षी राजनीति की सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी के खिलाफ साझा रणनीति और एकजुटता कायम करना है। ऐसे समय में यदि कोई संगठन विपक्ष के साझा मंच से दूरी रखता है, कांग्रेस के साथ राजनीतिक तालमेल नहीं बनाता और अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए अपनी राह चुनता है, तो उसके असर पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
राहुल गांधी ने CJP को साथ जोड़ने की कोशिश की, उसके नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध किया और उनके प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई का हिस्सा बताया। इसके बावजूद CJP ने विपक्ष के साझा मंच पर सक्रिय भागीदारी नहीं दिखाई। दूसरी ओर AAP भी INDIA ब्लॉक के भीतर कांग्रेस के साथ लगातार राजनीतिक तालमेल नहीं रखती। यही वह बिंदु है जहां AAP और CJP के राजनीतिक व्यवहार में समानता दिखाई देती है।
राहुल गांधी ने AAP को बीजेपी और RSS की ‘बी टीम’ कहा है। उनके इस बयान का राजनीतिक संदर्भ यही है कि विपक्षी एकता को कमजोर करने वाली राजनीति का फायदा अंततः किसे मिलता है? अब यही सवाल CJP के सामने भी खड़ा है।
केरल में प्रदर्शन, लेकिन सवाल दिल्ली से उठेंगे
CJP ने 7 नवंबर को कोच्चि के राजेंद्र मैदान में शाम चार बजे ‘जंतर-मंतर एट कोच्चि’ नाम से प्रदर्शन का ऐलान किया है। इसका घोषित मुद्दा SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली है। अभिजीत दीपके, विजय मल्लंगी और आफरीन नवाज के इसमें शामिल होने की संभावना है।
लेकिन CJP को यह स्पष्ट करना होगा कि वह विपक्षी एकता के साथ खड़ी है या अपनी अलग राजनीतिक राह पर चलते हुए विपक्षी दलों के बीच दूरी बढ़ा रही है। राहुल गांधी ने हाथ बढ़ाया, समर्थन दिया और साथ आने का अवसर दिया। अब तक CJP ने उस अवसर को साझा राजनीतिक भागीदारी में नहीं बदला है।
AAP के साथ उसके पुराने राजनीतिक संपर्क, AAP की ओर से मिला समर्थन और कांग्रेस से उसकी दूरी—इन सभी तथ्यों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या AAP और CJP की अलग-अलग राजनीति का परिणाम बीजेपी विरोधी विपक्ष को कमजोर करना है? और यदि ऐसा नहीं है, तो CJP को अपने राजनीतिक रुख और विपक्ष के साथ अपने संबंधों पर साफ जवाब देना चाहिए।
राजनीति में केवल नारे नहीं, राजनीतिक व्यवहार भी मायने रखता है। बीजेपी के खिलाफ लड़ाई का दावा करने वाले हर संगठन की भूमिका का आकलन उसके बयानों से नहीं, बल्कि उसके फैसलों और उसके राजनीतिक व्यवहार से होना चाहिए।



