राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 जून 2026
देश में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक रविवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और वहीं आमरण अनशन शुरू कर दिया। वे 20 जून से जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरने में शामिल हुए, जहां शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।
जंतर-मंतर पर सैकड़ों प्रदर्शनकारी, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल थे, वांगचुक के समर्थन में जुटे। कई किसान संगठनों के नेताओं ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई। प्रदर्शन की शुरुआत दो मिनट के मौन के साथ हुई, जिसके बाद छात्रों और आंदोलनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
आंदोलनकारी आरोप लगा रहे हैं कि हाल के वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं, विशेषकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET सहित कई परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल नहीं की गई तो मेहनत करने वाले छात्रों का व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा। इसी आधार पर प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
इस आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत डिपके पहले भी छात्रों, किसानों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से इस अभियान में शामिल होने की अपील कर चुके हैं। उनका कहना है कि यह केवल किसी एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है। आंदोलनकारी मांग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रणाली में हुई कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सोनम वांगचुक का इस आंदोलन में शामिल होना इसे नया राजनीतिक और सामाजिक महत्व देता माना जा रहा है। लद्दाख से जुड़े पर्यावरण, संवैधानिक अधिकारों और जनहित के मुद्दों पर लंबे समय से सक्रिय रहे वांगचुक ने अब शिक्षा और युवाओं के भविष्य के सवाल को भी राष्ट्रीय बहस का विषय बनाया है। उनके अनशन से आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि केंद्र सरकार की ओर से इस प्रदर्शन पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिक्षा मंत्रालय पहले भी परीक्षा सुधार, तकनीकी निगरानी और पेपर लीक रोकने के लिए विभिन्न कदम उठाने की बात कह चुका है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।




