आर्थिक/ व्यापार/ राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 11 सितंबर 2026
सरकार ने सरकारी बैंकों के कर्मचारियों के लिए लागू करने की तैयारी वाला प्रदर्शन आधारित वेतन प्रोत्साहन यानी PLI सिस्टम फिलहाल रोक दिया है, लेकिन बैंक कर्मचारियों की हड़ताल नहीं रुकी है। देशभर के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी आज 11 सितंबर को हड़ताल पर हैं। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल और फिर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की गई है। यानी PLI का मुद्दा पीछे हटने के बावजूद बैंक कर्मचारियों और सरकार के बीच विवाद खत्म नहीं हुआ है। सवाल यह है कि आखिर कर्मचारियों की ऐसी कौन-कौन सी मांगें हैं, जिनके कारण PLI हटने के बाद भी हड़ताल जारी है?
PLI हटाना ही काफी नहीं, कई मांगें अभी बाकी!
सात बैंक कर्मचारी यूनियनों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स का कहना है कि उनकी परेशानी सिर्फ PLI योजना तक सीमित नहीं है। PLI योजना को लेकर कर्मचारियों ने पहले भी विरोध किया था। यह योजना वित्तीय सेवा विभाग ने नवंबर 2024 में घोषित की थी और इसे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लागू किया जाना था। कर्मचारियों को चिंता थी कि वेतन का एक हिस्सा प्रदर्शन और बैंक के नतीजों से जोड़ने की व्यवस्था उनके लिए नुकसानदेह हो सकती है। सरकार ने अब इस योजना को रोक दिया है, लेकिन कर्मचारियों की दूसरी मांगें अभी भी बनी हुई हैं।
5 दिन बैंकिंग की मांग भी बड़ा मुद्दा
बैंक कर्मचारी लंबे समय से सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा काम का बढ़ता दबाव, कर्मचारियों की कमी, काम के घंटे और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े दूसरे मुद्दे भी यूनियनों की मांगों में शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बैंकिंग का काम लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसके मुकाबले कर्मचारियों और काम करने की परिस्थितियों से जुड़े सवालों का समाधान पर्याप्त तेजी से नहीं हुआ है। इसलिए केवल PLI को रोक देना उनके लिए आंदोलन खत्म करने की वजह नहीं बना।
ग्राहकों पर पड़ेगा सीधा असर
हड़ताल का सबसे सीधा असर बैंक ग्राहकों पर पड़ सकता है। शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने के साथ नकद लेन-देन, चेक, दस्तावेज और दूसरी बैंकिंग सेवाओं में देरी हो सकती है। हालांकि डिजिटल बैंकिंग और एटीएम जैसी सेवाएं पूरी तरह कर्मचारियों की शाखा-स्तरीय हड़ताल पर निर्भर नहीं हैं, फिर भी कुछ सेवाओं पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है। इससे खासकर उन लोगों को परेशानी हो सकती है जो बैंक की शाखा जाकर काम कराने पर निर्भर हैं।
अब सरकार और बैंक यूनियनों के बीच असली टकराव
बैंक कर्मचारियों की इस हड़ताल से एक बात साफ है—मामला सिर्फ PLI का नहीं रह गया है। सरकार ने एक बड़ी आपत्ति पर कदम पीछे जरूर खींचे हैं, लेकिन कर्मचारियों की बाकी मांगों पर सहमति नहीं बन पाई है। जनवरी 2026 में भी बैंक यूनियनों ने हड़ताल की थी और अब सितंबर-अक्टूबर में लगातार बड़े आंदोलन की घोषणा की गई है।
अब सवाल यह है कि अगर सरकार PLI योजना को रोकने के बाद भी बैंक कर्मचारियों को संतुष्ट नहीं कर पाई, तो क्या आने वाले दिनों में बैंकिंग सेवाओं पर दबाव और बढ़ेगा? और क्या सरकार 26 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल से पहले कर्मचारियों के साथ कोई बड़ा समझौता कर पाएगी?



