राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 अक्टूबर 2026
कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ अपना राजनीतिक हमला तेज करते हुए साफ कहा है कि उसका लक्ष्य सिर्फ सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि चुनाव के जरिए सत्ता परिवर्तन करना और मौजूदा व्यवस्था को बदलना भी है। AICC के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार का विरोध करना, उसकी नीतियों और कामकाज को जनता के सामने उजागर करना और संभव हो तो उसे चुनाव में सत्ता से हटाना है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के कथन—“Oppose, expose and if possible depose”—का हवाला देते हुए कहा कि यही लोकतांत्रिक विपक्ष की जिम्मेदारी है।
BJP नेताओं की ओर से कांग्रेस पर ‘Regime Change’ की बात करने को लेकर उठाए गए सवालों के जवाब में खेड़ा ने इसे लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा बताया। उनका कहना है कि विपक्ष चुनाव के जरिए सरकार बदलने की बात कर रहा है और इसमें कुछ भी असंवैधानिक नहीं है। कांग्रेस ने अपने अभियान ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के जरिए भी चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को राजनीतिक बहस के केंद्र में रखा है।
‘संघ का भारतीयकरण नहीं, पूरे भारत का संघीकरण हुआ’
पवन खेड़ा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और केंद्र सरकार पर संस्थानों में वैचारिक प्रभाव बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों, चुनाव आयोग और नौकरशाही सहित विभिन्न संस्थानों में संघ की विचारधारा का प्रभाव दिखाई देता है। खेड़ा ने इसे ऐसी व्यवस्था बताया, जिसे कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से बदलना चाहती है।
उन्होंने तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए आरोप लगाया कि एक गैर-राजनीतिक संगठन ने व्यवस्था पर अपना प्रभाव स्थापित कर लिया है और कांग्रेस ऐसी स्थिति में निष्क्रिय विपक्ष बनकर नहीं बैठ सकती। ये कांग्रेस नेता के राजनीतिक आरोप हैं; संस्थानों में RSS के प्रभाव की सीमा और प्रकृति पर अलग-अलग पक्षों के मत हैं।
चुनाव आयोग पर सवाल, जवाबदेही की मांग
खेड़ा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर उठ रहे सवालों पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उनका आरोप है कि जब सवाल चुनाव आयोग से पूछे जाते हैं, तो जवाब देने के लिए केंद्र सरकार सामने आ जाती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मीडिया संस्थानों के संपादकों को आमंत्रित कर ऑफ-द-रिकॉर्ड ब्रीफिंग दे रहे हैं। इन दावों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और स्वतंत्र पुष्टि के बिना इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर चुनाव आयोग को खुद सामने आकर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। पार्टी ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अभियान को इसी मांग से जोड़ रही है। विपक्ष का तर्क है कि चुनावी व्यवस्था पर उठने वाले सवालों का समाधान पारदर्शिता, तथ्य और निष्पक्ष जांच से होना चाहिए।
‘विरोध करना देशद्रोह नहीं, लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है’
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार और BJP के नेता विरोध करने वालों को ‘देशविरोधी’, ‘लेफ्टिस्ट’ और अन्य राजनीतिक विशेषणों से निशाना बनाते हैं। उनके मुताबिक, इस तरह की भाषा असहमति को दबाने का प्रयास है। उन्होंने राजनाथ सिंह से सवाल किया कि विपक्ष ने कब सरकार से अपना कार्यकाल पांच से बढ़ाकर दस साल करने की मांग की थी। खेड़ा के अनुसार, विपक्ष का उद्देश्य सरकार को चुनाव में चुनौती देना है, न कि उसे अतिरिक्त समय देना।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार को विपक्ष के आंदोलन और सत्ता परिवर्तन की मांग पर आपत्ति है, तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि लोकतांत्रिक विरोध किस तरह गैरकानूनी हो सकता है। कांग्रेस नेता ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को अपने अभियान का आधार बताया।
पवन खेड़ा का संदेश स्पष्ट है: कांग्रेस सरकार बदलने की मांग से पीछे हटने वाली नहीं है। ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अभियान के जरिए पार्टी चुनाव आयोग की जवाबदेही और सत्ता परिवर्तन के मुद्दे को जनता के बीच ले जाना चाहती है। अब इस राजनीतिक टकराव का अगला पड़ाव संसद, सड़क और अंततः चुनावी मैदान होगा।



