अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 15 अक्टूबर 2026
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य हमलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी मीडिया में लीक करने वालों के खिलाफ बेहद सख्त बयान दिया है। एरिजोना में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों की योजना और समय से जुड़ी जानकारी लीक करने वालों को गोली मार देनी चाहिए। इस बीच, पश्चिम एशिया में संघर्ष का असर ऊर्जा आपूर्ति, क्षेत्रीय सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से उर्वरकों की आपूर्ति बहाल करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच जल्द समझौता नहीं हुआ तो एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में खाद्य संकट पैदा हो सकता है।
ट्रंप बोले—गोपनीय जानकारी लीक करने वालों को गोली मारनी चाहिए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एरिजोना में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सैन्य अभियानों से संबंधित संवेदनशील जानकारी मीडिया तक पहुंचाने वालों पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की योजना और उसके समय से जुड़ी जानकारी लीक करने वालों को फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मौत की सजा दी जानी चाहिए।
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी सैन्य अभियानों और ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की योजनाओं को लेकर चर्चाएं जारी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप इस बात से नाराज थे कि हमलों के समय से संबंधित जानकारी पत्रकारों तक कैसे पहुंची।
उनके बयान से अमेरिका में सरकारी गोपनीयता, राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील सैन्य जानकारी के सार्वजनिक होने को लेकर बहस तेज हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में किसी व्यक्ति के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई की घोषणा की गई है या नहीं।
सऊदी अरामको मुख्यालय पर हूती हमले की खबर
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सऊदी अरब के धहरान शहर में सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको के मुख्यालय पर हूती विद्रोहियों के हमले की खबर भी सामने आई है। क्षेत्रीय अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि हमले में इमारत की ऊपरी तीन मंजिलों को नुकसान पहुंचा। इनमें कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय भी शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली।
हूती आंदोलन को ईरान का समर्थन प्राप्त है और सऊदी अरब के साथ उसका लंबे समय से संघर्ष रहा है। अरामको जैसे प्रमुख ऊर्जा प्रतिष्ठान पर हमले की खबर क्षेत्रीय सुरक्षा और तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा सकती है। हालांकि, हमले से हुए नुकसान और उसके व्यापक प्रभाव का आकलन संबंधित आधिकारिक जानकारी के आधार पर किया जाना होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य में उर्वरक आपूर्ति पर चिंता
संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और ईरान आने वाले कुछ सप्ताह में होर्मुज जलडमरूमध्य से उर्वरकों की आवाजाही सुनिश्चित करने वाली प्रस्तावित व्यवस्था पर सहमत नहीं होते, तो एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में खाद्य सुरक्षा का संकट पैदा हो सकता है।
संयुक्त राष्ट्र ने मार्च में इस जलमार्ग से उर्वरकों की आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए एक कार्यबल गठित किया था। लेकिन संबंधित व्यवस्था अभी लागू नहीं हो पाई है। संयुक्त राष्ट्र के उप महासचिव जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनने के बाद इस व्यवस्था को सात से दस दिनों में सक्रिय किया जा सकता है।
अधिकारी ने चेताया कि यदि अगले कुछ सप्ताह में समझौता नहीं हुआ तो बुवाई का मौसम प्रभावित हो सकता है। उर्वरकों की समय पर आपूर्ति कृषि उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। आपूर्ति बाधित रहने से किसानों की लागत बढ़ने, फसलों की पैदावार प्रभावित होने और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव पड़ने का जोखिम पैदा हो सकता है।
ईरान ने भी युद्ध के लिए तैयार रहने की बात कही
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी रहने के बावजूद ईरान को संभावित युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि वाशिंगटन के साथ किसी समझौते पर हस्ताक्षर हो जाने से भविष्य में हमले का खतरा समाप्त होने की गारंटी नहीं मिलती।
गालिबाफ ने अमेरिका पर वादे तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि ईरान को अपनी रक्षा के लिए तैयार रहना होगा। उनके बयान से संकेत मिलता है कि कूटनीतिक बातचीत के साथ सैन्य तैयारियों को लेकर भी तेहरान का रुख सख्त बना हुआ है।
ईरान के खिलाफ बड़े बम के इस्तेमाल की योजना की रिपोर्ट
इस बीच, अमेरिकी समाचार चैनल CNN की एक रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया कि यदि ईरान के साथ लड़ाई दोबारा शुरू होती है, तो अमेरिकी सेना ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु ठिकानों पर हमले के लिए GBU-43/B मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट बम के इस्तेमाल की योजना पर विचार कर सकती है। इसे ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ भी कहा जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस हथियार के संभावित इस्तेमाल को लेकर सैन्य उद्देश्यों और उसके प्रभाव पर सवाल बने हुए हैं। फिलहाल इसे संभावित सैन्य योजना के रूप में ही देखा जाना चाहिए; उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि इसके इस्तेमाल का अंतिम निर्णय लिया जा चुका है।
पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्था पर भी असर की आशंका
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एक क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा है कि संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया की ऊर्जा-संपन्न अर्थव्यवस्थाओं की मध्यम अवधि में पहले जैसी स्थिति में लौटने की संभावना सीमित है। उनके अनुसार, बुनियादी ढांचे को नुकसान और विभिन्न क्षेत्रों में व्यवधान का आर्थिक प्रभाव लंबे समय तक रह सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर अब केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं है। ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, उर्वरकों की आपूर्ति, कृषि उत्पादन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी खतरे मंडरा रहे हैं। आने वाले सप्ताहों में कूटनीतिक बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बहाल करने की कोशिशें इस संकट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।



