राष्ट्रीय/ अपराध/ पंजाब | ABC NATIONAL NEWS | मानसा, पंजाब | 13 अक्टूबर 2026
पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह उर्फ ‘झोटा’ की मंगलवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। मानसा जिले में हुई इस घटना ने नशे के अवैध कारोबार और उसे उजागर करने वालों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार, एक मेडिकल स्टोर पर कुछ दवाएं बेचे जाने को लेकर झोटा और दुकान के मालिक के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान झोटा को गोली मार दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई।
परविंदर सिंह ‘झोटा’ नशे की लत पैदा करने वाली दवाओं की कथित अवैध बिक्री को उजागर करने के लिए जाने जाते थे। वह मेडिकल स्टोरों पर ऐसी दवाओं की बिक्री के खिलाफ आवाज उठाते थे। मंगलवार को भी वह एक व्यक्ति को कुछ दवाएं बेचे जाने को लेकर मेडिकल स्टोर मालिक से सवाल कर रहे थे। इस दौरान वह अपने मोबाइल फोन से बहस रिकॉर्ड भी कर रहे थे।
दवाओं की बिक्री पर सवाल, फिर चली गोली
मिली जानकारी के अनुसार, झोटा एक मेडिकल स्टोर पर दवाओं की बिक्री को लेकर दुकानदार से जवाब मांग रहे थे। इसी बातचीत के दौरान दोनों के बीच बहस हुई। झोटा मोबाइल फोन से पूरी बहस रिकॉर्ड कर रहे थे, तभी उन्हें गोली मार दी गई। इस घटना में उनकी जान चली गई।
घटना की सूचना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, गोली चलाने का आरोप मेडिकल स्टोर के मालिक पर है। मामले में जांच के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों और जिम्मेदारी की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर सवाल
परविंदर सिंह ‘झोटा’ नशे की लत लगाने वाली दवाओं की बिक्री के खिलाफ सक्रिय थे। ऐसे में उनकी हत्या ने यह सवाल खड़ा किया है कि यदि कोई व्यक्ति अवैध गतिविधियों को उजागर करने की कोशिश करता है, तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?
नशे का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है। इसका सीधा असर युवाओं, परिवारों और पूरे समाज पर पड़ता है। नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर रोक लगाना, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना और शिकायत करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की अहम जिम्मेदारी है।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई जरूरी
इस मामले में सबसे जरूरी है कि पुलिस हत्या की निष्पक्ष जांच करे, घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाए और कानून के अनुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करे। मोबाइल फोन में रिकॉर्ड हुई बातचीत भी जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है, यदि वह उपलब्ध है और जांच एजेंसियों को प्राप्त होती है।
परविंदर सिंह ‘झोटा’ की मौत ने नशे के खिलाफ चल रही मुहिम के सामने एक गंभीर चुनौती रख दी है। अब सवाल केवल एक हत्या की जांच का नहीं, बल्कि नशे की अवैध बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई और उसे उजागर करने वालों की सुरक्षा का भी है। पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई तभी मजबूत होगी, जब शिकायतों पर कार्रवाई हो, कानून का निष्पक्ष पालन हो और किसी भी व्यक्ति को अपनी आवाज उठाने की कीमत अपनी जान देकर न चुकानी पड़े।



