राष्ट्रीय/संसद | ABC NATIONAL NEWS | 9 अगस्त 2026
नई दिल्ली। विदेशी चंदे और उससे जुड़ी संपत्तियों के नियमन को लेकर केंद्र सरकार के प्रस्तावित Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 पर संसद में सियासी टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। विपक्ष ने संकेत दिया है कि वह बिल के मौजूदा स्वरूप का विरोध करेगा। कांग्रेस ने अपने सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को संसद में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है। विपक्षी दलों ने बिल को संयुक्त रूप से चुनौती देने और जरूरत पड़ने पर इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की मांग उठाई है।
FCRA बिल पर विपक्ष लामबंद
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि FCRA बिल को लेकर विपक्ष सोमवार को सर्वदलीय बैठक के बाद अपना रुख तय करेगा। विपक्ष की रणनीति यह सुनिश्चित करने की है कि बिल पर चर्चा और संभावित मतदान के दौरान उसके सभी सांसद सदन में मौजूद रहें।
कांग्रेस ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सांसदों को 10 से 12 अगस्त तक सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। पार्टी ने INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों से भी अपने सांसदों की मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा है।
हालांकि, अगले सप्ताह के सरकार के अस्थायी कामकाज में फिलहाल FCRA संशोधन बिल का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
आखिर क्या बदलना चाहती है सरकार?
प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल का उद्देश्य Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 में बदलाव करना है। यह कानून विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों को नियंत्रित करता है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द हो जाता है, वापस ले लिया जाता है या उसकी अवधि समाप्त हो जाती है, तो उसके पास मौजूद विदेशी चंदे और उससे बनाई गई संपत्तियों को एक ‘नामित प्राधिकरण’ (Designated Authority) के नियंत्रण में लाने का प्रावधान है।
सरकार का प्रस्तावित ढांचा ऐसे मामलों में विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन और संबंधित संस्थाओं की गतिविधियों की निगरानी की भी अनुमति देता है।
तीन धाराओं पर सबसे ज्यादा विवाद
FCRA बिल की धारा 14B, 16A और 16B को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठाए जा रहे हैं।
धारा 14B FCRA प्रमाणपत्र के समाप्त होने की परिस्थितियों से संबंधित है। वहीं धारा 16A के तहत ऐसी संस्था के विदेशी फंड और उससे बनी संपत्तियों को नामित प्राधिकरण के अधीन रखने का प्रस्ताव है।
सबसे बड़ा विवाद धारा 16B को लेकर है। इसके तहत नई व्यवस्था को उन संपत्तियों पर भी लागू करने की संभावना जताई गई है जो पुराने कानून के तहत पहले ही निहित हो चुकी हैं। विपक्ष और कुछ संगठनों को आशंका है कि इससे पुराने मामलों में भी इसका असर पड़ सकता है।
कांग्रेस ने बताया ‘असंवैधानिक’
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने प्रस्तावित बिल का विरोध करते हुए इसे ‘पूरी तरह असंवैधानिक’ बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि इससे गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े संगठनों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है।
कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के सामने नए कानून के कारण अतिरिक्त प्रशासनिक और कानूनी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
TMC और NCP भी विरोध में
तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने बिल को कठोर बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था से NGOs और सामाजिक संस्थाओं पर कार्यपालिका का नियंत्रण जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है।
NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी मौजूदा स्वरूप में बिल का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग को हमेशा संदेह की नजर से नहीं देखा जा सकता। उनका सुझाव है कि सरकार बिल वापस ले या इसे JPC को भेजे।
ईसाई संगठनों की चिंताएं भी सामने आईं
बिल को लेकर कुछ ईसाई संगठनों और चर्च संस्थाओं ने भी चिंता जताई है। केरल में कैथोलिक चर्च समेत कुछ संगठनों ने प्रस्तावित प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं।
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य से जुड़ी चिंताओं और सुझावों को रखा है। इससे पहले मिजोरम में बिल के विरोध में प्रदर्शन भी हुआ था।
DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने भी केंद्र से FCRA संशोधन बिल वापस लेने की मांग की है।
सरकार की पकड़ बढ़ेगी या पारदर्शिता?
FCRA बिल पर मूल विवाद विदेशी चंदे के नियमन से ज्यादा सरकारी अधिकारों की सीमा को लेकर दिखाई दे रहा है। सरकार के लिए विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता, जवाबदेही और दुरुपयोग रोकना महत्वपूर्ण मुद्दा है, जबकि विपक्ष और कुछ संगठन आशंकित हैं कि प्रस्तावित प्रावधानों से सरकारी हस्तक्षेप जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 15 जुलाई 2026 तक 14,449 FCRA पंजीकरण सक्रिय थे, जबकि 22,498 रद्द और 15,212 समाप्त हो चुके थे। ऐसे में प्रस्तावित कानून का दायरा काफी व्यापक हो सकता है।
संसद में बढ़ेगा सियासी तापमान
FCRA संशोधन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव ऐसे समय बढ़ रहा है जब संसद का मानसून सत्र पहले से ही कई मुद्दों पर हंगामे का सामना कर रहा है। कांग्रेस का व्हिप और विपक्ष की संभावित सर्वदलीय रणनीति संकेत दे रही है कि बिल संसद में आसानी से आगे बढ़ने वाला नहीं है।
अब निगाहें सोमवार की विपक्षी बैठक और सरकार के अगले कदम पर हैं। यदि बिल सदन में आता है तो विदेशी फंडिंग, NGOs की स्वतंत्रता, सरकारी नियंत्रण और संपत्तियों के अधिकार जैसे मुद्दों पर तीखी बहस तय मानी जा रही है।
FCRA संशोधन बिल अब केवल विदेशी चंदे के नियमन का सवाल नहीं रह गया है। यह सरकार के अधिकार बनाम संस्थाओं की स्वायत्तता और पारदर्शिता बनाम संभावित सरकारी हस्तक्षेप की बड़ी राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है।




