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जमीन पर सिर्फ BJP? बाकी नेता शायद हवा में खेती करते होंगे

महेंद्र सिंह। नई दिल्ली 16 नवंबर 2025

भारतीय राजनीति में एक नया सिद्धांत आया है। इसे ‘जमीन पर काम का एकाधिकार’ कहते हैं।इसका मतलब है: धरती पर मेहनत का लाइसेंस सिर्फ BJP के पास है। बाकी नेता क्या करते हैं? वे शायद बादलों पर खेती करते हैं। या चांद पर सड़कें बनाते हैं। वे मंगल पर जनसंपर्क करते हैं। इसीलिए वे चुनाव हार जाते हैं। यह सिद्धांत बहुत मनोरंजक है। यह राजनीति के विज्ञान में एक बड़ा योगदान है। आइंस्टाइन भी इसे देखकर चौंक जाते!

यह दावा हास्यास्पद है। पूरा देश एक पार्टी की वजह से टिका है। बाकी नेता तैरते रहते हैं। यह बात लाखों कार्यकर्ताओं की मेहनत को अनदेखा करती है। जबकि आज हर कोई जानता है कि बीजेपी और चुनाव आयोग का चोली दामन का साथ है। आयोग वोट की डकैती करता है और बीजेपी चुनाव जीत जाती है। 

लेकिन आजकल बहस का फॉर्मूला बहुत आसान है। हर हार का एक ही कारण है। नेता ‘जमीन पर काम’ नहीं कर पाए। BJP प्रवक्ता यह लाइन बहुत जोर से कहते हैं। लगता है, उनके पास GPS ट्रैकर है। यह हर नेता की ग्राउंड एक्टिविटी देखता है। नतीजा क्या? केजरीवाल जमीन पर नहीं थे, हार गए। भूपेश बघेल नहीं उतरे, हार गए। गहलोत की जमीन किसी और के पास थी, हार गए। हुड्डा की जमीन पर नेटवर्क नहीं था, हार गए।

कोई मुख्यमंत्री पाँच साल खूब काम करे। किसानों, मजदूरों से रोज़ मिले। योजनाएँ चलाए। लेकिन BJP की नज़र में ‘जमीन पर काम नहीं किया’, तो सब हवा हो जाएगा। पाँच साल की मेहनत बेकार। एक मज़ेदार सवाल है। अगर सिर्फ BJP जमीन पर है, तो बाकी नेता कहाँ हैं? क्या वे बादलों में मीटिंग करते हैं? हवा में तैरकर जनता की समस्या सुनते हैं? क्या वे किसी अदृश्य प्लेटफॉर्म पर प्रचार करते हैं? कैमरे भी उन्हें नहीं पकड़ पाते?

सबसे मजेदार बात: जब ये नेता चुनाव जीतते हैं, तब कोई नहीं पूछता। कौन-सी जमीन पर काम किया? क्या वह जमीन किसी और ग्रह की थी? BJP का नैरेटिव सेट करने का तरीका कमाल है। अगर BJP जीते: हमने जमीन पर काम किया। जनता ने हमें आशीर्वाद दिया। अगर विपक्ष हारे: उन्होंने जमीन पर काम नहीं किया। जनता ने उन्हें नापसंद किया। अगर विपक्ष कभी जीत जाए? तब नया नैरेटिव आता है। जनता भ्रमित हो गई। हमारा संदेश नहीं पहुँचा। 

मतलब, हर जीत का हीरो एक ही। हर हार का कारण भी एक ही। विपक्षी नेता चाहे जितना पसीना बहाएं। उनका नतीजा एक ही लाइन में खत्म। “जमीन पर काम नहीं किया।” ‘जमीन’ आखिर क्या है? BJP की राजनीति में ‘जमीन’ एक वस्तु नहीं है। यह एक आध्यात्मिक कॉन्सेप्ट है। जो BJP करे वही जमीन का काम। बाकी सब सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट। वाह! ऐसी परिभाषा तो कहीं नहीं मिलेगी।

सच यह है: हर पार्टी में मेहनती लोग हैं। हर पार्टी में सोशल मीडिया वाले भी हैं। लेकिन नैरेटिव की ताकत देखिए। BJP बोले तो वह सच है। बाकी बोले तो वह सिर्फ शिकायत है। इसलिए ‘जमीन पर काम’ अब काम नहीं है। यह सिर्फ एक नारा बन गया है। जो खूब चलता है। खूब बिकता है। और हार के बाद सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होता है!

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