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भारत की नई गुणवत्ता जांच से नेपाल की चाय उद्योग में चिंता, दो हफ्तों में दूसरी बार निर्यात प्रभावित

अंतरराष्ट्रीय/व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 5 जून 2026

भारत द्वारा नेपाली चाय के आयात पर गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया फिर से सख्त किए जाने के बाद नेपाल का चाय उद्योग एक बार फिर संकट में घिर गया है। महज दो सप्ताह पहले भारत ने परीक्षण संबंधी कुछ नियमों में ढील देकर नेपाली निर्यातकों को राहत दी थी, लेकिन अब भारतीय अधिकारियों द्वारा दोबारा अनिवार्य सैंपलिंग और प्रयोगशाला परीक्षण शुरू किए जाने से भारतीय खरीदारों ने नेपाली चाय की खरीद रोक दी है। इस घटनाक्रम ने नेपाल के चाय उत्पादकों, निर्यातकों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि नेपाल का चाय उद्योग बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार पर निर्भर है और निर्यात में किसी भी प्रकार की बाधा सीधे लाखों लोगों की आजीविका को प्रभावित कर सकती है।

नेपाल टी प्लांटर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता के अनुसार पिछले चार से पांच दिनों से भारतीय व्यापारियों ने नेपाली चाय की खरीद लगभग बंद कर दी है। उनका कहना है कि भारत के टी बोर्ड ने खरीदारों के गोदामों से चाय के नमूने एकत्र करने और प्रयोगशाला से मंजूरी मिलने के बाद ही बिक्री की अनुमति देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे भारतीय आयातकों में अनिश्चितता बढ़ गई है, क्योंकि यदि परीक्षण में कोई समस्या सामने आती है तो उन्हें पूरा माल वापस करना या नष्ट करना पड़ सकता है। इस आशंका के कारण कई व्यापारियों ने फिलहाल खरीद रोक दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सबसे अधिक असर नेपाल की ऑर्थोडॉक्स चाय पर पड़ रहा है, क्योंकि यही चाय बड़ी मात्रा में भारत को निर्यात की जाती है। दूसरी ओर सीटीसी (क्रश, टियर एंड कर्ल) चाय का उत्पादन इस वर्ष पहले ही काफी घट चुका है। नेपाल के चाय बागानों में हरी पत्तियों की कम उपलब्धता के कारण सीटीसी उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो गया है। हालांकि ऑर्थोडॉक्स चाय का उत्पादन अभी सामान्य बना हुआ है, लेकिन निर्यात में रुकावट आने से उत्पादकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

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नेपाल का चाय उद्योग पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में कीटों के प्रकोप और बढ़ती उत्पादन लागत के कारण चाय उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई थी। लगातार बढ़ते खर्चों और घटते लाभ के कारण कई किसान चाय की खेती छोड़कर अन्य फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे समय में निर्यात पर नई बाधाएं उद्योग के लिए और अधिक चिंता का विषय बन गई हैं। नेपाल के पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों में हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से चाय उद्योग पर निर्भर हैं, इसलिए निर्यात में किसी भी गिरावट का असर व्यापक स्तर पर महसूस किया जा सकता है।

भारत ने 1 मई 2026 से सभी आयातित चाय खेपों के लिए अनिवार्य परीक्षण व्यवस्था लागू की थी। भारत सरकार का कहना था कि इस कदम का उद्देश्य गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करना और मिलावट पर रोक लगाना है। नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत प्रत्येक आयातित चाय खेप का नमूना लेकर प्रयोगशाला परीक्षण आवश्यक किया गया था। इसके लिए भारतीय आयातकों को टी काउंसिल पोर्टल पर विस्तृत जानकारी जमा करनी होती थी और प्रत्येक नमूने पर 11,120 रुपये के साथ जीएसटी शुल्क भी देना पड़ता था। इस व्यवस्था के कारण नेपाल से होने वाला चाय निर्यात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था।

नेपाल और भारत के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद 20 मई को भारत ने नियमों में आंशिक ढील दी थी। उस समय भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के निर्देश पर घरेलू उपभोग के लिए आयात की जाने वाली चाय को अनिवार्य प्रयोगशाला परीक्षण से छूट दे दी गई थी, जबकि पुनः निर्यात के लिए आयात की जाने वाली चाय पर परीक्षण की शर्त बरकरार रखी गई थी। इस फैसले से नेपाली उत्पादकों और निर्यातकों को बड़ी राहत मिली थी और उम्मीद जगी थी कि व्यापार सामान्य हो जाएगा। लेकिन अब एक बार फिर परीक्षण प्रक्रिया शुरू होने से उद्योग में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

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नेपाल टी एंड कॉफी डेवलपमेंट बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें भी जानकारी मिली है कि भारतीय एजेंसियां नेपाली चाय की अनिवार्य जांच कर रही हैं, लेकिन इस संबंध में अब तक कोई औपचारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। यही कारण है कि नेपाल में भ्रम और चिंता दोनों की स्थिति बनी हुई है। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो निर्यात में और गिरावट आ सकती है तथा किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

नेपाल अपनी लगभग 90 प्रतिशत ऑर्थोडॉक्स चाय भारत को निर्यात करता है। यही कारण है कि भारतीय बाजार में किसी भी प्रकार की नीति परिवर्तन का सीधा असर नेपाली चाय उद्योग पर पड़ता है। नेपाल हर वर्ष लगभग 7,800 टन ऑर्थोडॉक्स चाय का उत्पादन करता है, लेकिन तीसरे देशों में निर्यात का हिस्सा अभी भी बहुत सीमित है। चालू वित्तीय वर्ष के पहले दस महीनों में नेपाल ने 11,393 टन चाय का निर्यात किया, जिसकी कीमत लगभग 3.35 अरब नेपाली रुपये रही। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 14,030 टन और 3.97 अरब रुपये था, जिससे स्पष्ट है कि निर्यात पहले ही दबाव में है।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत और नेपाल के बीच खाद्य उत्पादों के गुणवत्ता प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता को और मजबूत करने की आवश्यकता है। पिछले वर्ष भारत ने नेपाल की कुछ खाद्य प्रयोगशालाओं के प्रमाणपत्रों को मान्यता दी थी, लेकिन चाय अभी भी पूर्ण मान्यता प्राप्त उत्पादों की सूची में शामिल नहीं हो सकी है। जब तक इस मुद्दे का स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक नेपाली चाय उद्योग को समय-समय पर ऐसी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

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नेपाल के चाय उत्पादक और निर्यातक भारत सरकार तथा संबंधित एजेंसियों से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि व्यापारिक अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रही तो इसका असर केवल निर्यात आंकड़ों पर ही नहीं बल्कि हजारों किसानों और श्रमिकों की आजीविका पर भी पड़ेगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच शीघ्र संवाद और स्थायी समाधान की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

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