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नेपाल के मधेश बजट में फिर छोटे प्रोजेक्ट्स की भरमार, सरकार के दावे पर उठे सवाल

अंतरराष्ट्रीय/ नेपाल | ABC NATIONAL NEWS | जनकपुरधाम | 1 जुलाई 2026

नेपाल के मधेश प्रांत की सरकार ने छोटे-छोटे विकास कार्यों पर खर्च रोकने का दावा किया था, लेकिन बजट की आधिकारिक ‘रेड बुक’ ने सरकार के दावों की पोल खोल दी है। करोड़ों रुपये के बजट में अब भी छोटे और बिखरे हुए प्रोजेक्ट्स को जोड़कर बड़े प्रोजेक्ट का रूप दिया गया है।

15 जून को वित्त मंत्री युवा राज भट्टराई ने घोषणा की थी कि 1 करोड़ नेपाली रुपये (10 मिलियन) से कम लागत वाली नई योजनाओं को मंजूरी नहीं दी जाएगी। साथ ही गैर-जरूरी खर्च कम करने और पूंजीगत विकास को प्राथमिकता देने का वादा किया गया था।

छोटे कामों को जोड़कर बनाया गया बड़ा प्रोजेक्ट

रेड बुक के अनुसार, सरकार ने अलग-अलग गांवों और नगरपालिकाओं के छोटे-छोटे कार्यों को एक ही बजट शीर्षक के तहत जोड़ दिया।

एक ही परियोजना में कहीं मस्जिदों का उन्नयन, कहीं मंदिरों का सौंदर्यीकरण, कब्रिस्तानों की चारदीवारी, ईदगाह का विकास, सड़क निर्माण, भवन मरम्मत और बोरिंग जैसे असंबंधित कार्य शामिल कर दिए गए, ताकि कागजों में परियोजना की लागत 1 करोड़ रुपये से अधिक दिखाई दे।

विपक्ष बोला- लागू करना होगा मुश्किल

जनता समाजवादी पार्टी (JSP) के प्रवक्ता मनीष कुमार सुमन ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों और अलग प्रकृति के कामों को एक ही परियोजना में जोड़ने से कानूनी और व्यावहारिक दोनों तरह की समस्याएं पैदा होंगी।

उनके अनुसार, यदि किसी एक स्थान पर विवाद हुआ तो पूरी परियोजना का बजट अटक सकता है। उन्होंने कहा कि पुल, मंदिर और धर्मशाला जैसे अलग-अलग कामों को एक ही फाइल में डालने से विकास कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाएंगे।

सरकार ने किया बचाव

वित्त मंत्री युवा राज भट्टराई ने कहा कि ऐसा केवल कुछ मामलों में किया गया है। उनका दावा है कि पहले से लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए दो-तीन योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है और इससे बजट लागू करने में कोई बड़ी समस्या नहीं आएगी।

राजनीतिक विवाद तेज

विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने जनता और मीडिया की आलोचना से बचने के लिए सिर्फ कागजों में छोटे प्रोजेक्ट्स को बड़ा दिखाया है, जबकि जमीनी स्तर पर बजट पहले की तरह ही बिखरा हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बजट का यही स्वरूप रहा तो विकास कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है और बड़ी परियोजनाओं पर ध्यान देने का सरकार का दावा कमजोर पड़ सकता है।

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