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नेपाल में ‘Gen Z सरकार’ को बड़ा झटका: गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने 26 दिन में दिया इस्तीफा

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 22 अप्रैल 2026

व्यापारिक संबंधों और वित्तीय लेन-देन पर उठे सवाल, बोले—“नैतिकता किसी भी पद से ऊपर”

नेपाल की नई और युवा नेतृत्व वाली सरकार को बड़ा झटका लगा है। देश के गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने पद संभालने के महज 26 दिनों के भीतर इस्तीफा दे दिया। उनका यह फैसला ऐसे समय आया है जब उन पर विवादित कारोबारियों से संबंध और वित्तीय लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे थे। नेपाल की राजनीति में इस घटनाक्रम ने अचानक हलचल बढ़ा दी है। गुरुंग ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए साफ कहा कि वे किसी भी तरह की जांच को प्रभावित नहीं करना चाहते और नैतिकता उनके लिए पद से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ उठे सवालों की निष्पक्ष जांच हो, इसलिए उन्होंने खुद ही पद छोड़ने का फैसला किया।

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से गुरुंग पर एक विवादित कारोबारी के साथ कथित संबंधों और शेयर लेन-देन को लेकर आरोप लग रहे थे। इन आरोपों के सामने आने के बाद विपक्ष के साथ-साथ जनता के बीच भी सवाल उठने लगे थे। मामला इतना बढ़ गया कि सरकार और उनकी पार्टी के भीतर भी दबाव महसूस किया जाने लगा।

गुरुंग ने सोशल मीडिया के जरिए अपने इस्तीफे की जानकारी देते हुए कहा कि “मैं पद पर रहते हुए किसी भी तरह के हितों के टकराव (conflict of interest) की स्थिति नहीं चाहता।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे और सच्चाई सामने आने देंगे।

गौरतलब है कि सुदन गुरुंग नेपाल की उस नई पीढ़ी के नेताओं में शामिल हैं, जो 2025 के Gen Z आंदोलन के बाद तेजी से उभरे थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकले इस युवा नेतृत्व ने हाल ही में सत्ता संभाली थी और लोगों को बड़ी उम्मीदें थीं।

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लेकिन सरकार बनने के कुछ ही हफ्तों के भीतर गृहमंत्री का इस्तीफा इस बात का संकेत दे रहा है कि नई सरकार भी विवादों से अछूती नहीं है। इससे प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर भी दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि यह इस्तीफा सीधे तौर पर सरकार की छवि और स्थिरता से जुड़ा हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा भले ही नैतिक आधार पर लिया गया कदम हो, लेकिन इससे सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होंगे। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे और सरकार की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह मामला सिर्फ एक इस्तीफा बनकर रह जाता है या फिर बड़े राजनीतिक संकट में बदलता है।

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