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तीन महीने बाद बड़ी सफलता! भारतीय LNG जहाज ‘दिशा’ सुरक्षित होर्मुज पार कर भारत की ओर रवाना

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 जून 2026

पश्चिम एशिया में तीन महीने से जारी तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) वाहक जहाज ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गया है। यह पिछले तीन महीनों में युद्ध प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने वाला पहला भारतीय LNG जहाज बन गया है।

शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, ‘दिशा’ जहाज में लगभग 62,370 मीट्रिक टन LNG कार्गो लदा हुआ है। यह जहाज शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम द्वारा संचालित किया जा रहा है। जहाज के सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकलने को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अमेरिका-ईरान संघर्ष और क्षेत्रीय युद्ध के कारण पिछले तीन महीनों से इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी। कई जहाजों को सुरक्षा कारणों से अपने मार्ग बदलने पड़े, जबकि अनेक जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘दिशा’ का सुरक्षित पारगमन इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित शांति समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की प्रक्रिया के बीच यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज मार्ग का खुलना और भारतीय जहाजों का सुरक्षित आवागमन देश की ऊर्जा आपूर्ति, तेल और गैस की उपलब्धता तथा महंगाई पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। यदि आने वाले दिनों में इसी तरह जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है तो भारत को ईंधन आपूर्ति और परिवहन लागत के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है।

हालांकि समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल होने में अभी समय लगेगा। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, बीमा लागत और युद्ध के दौरान उत्पन्न जोखिमों को पूरी तरह समाप्त होने में कई सप्ताह लग सकते हैं।

‘दिशा’ का सुरक्षित रूप से होर्मुज पार करना भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यह न केवल भारतीय समुद्री क्षमता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि लंबे समय से बाधित ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट सकती है।

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