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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को अकाल तख्त का बड़ा झटका, सिख धर्मगुरुओं ने घोषित किया ‘गुरु-दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | चंडीगढ़/अमृतसर | 15 जून 2026

पंजाब की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब सिखों की सर्वोच्च धार्मिक पीठ अकाल तख्त से मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया गया। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने भगवंत मान को “गुरु-दोखी” और “खालसा पंथ विरोधी” घोषित कर दिया।

यह फैसला एक कथित आपत्तिजनक वीडियो विवाद और उससे जुड़े घटनाक्रम के बाद लिया गया। अकाल तख्त में आयोजित सभा के दौरान सिख धर्मगुरुओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले में अकाल तख्त के समक्ष सही जानकारी नहीं दी और तथ्यों को लेकर भ्रम पैदा किया।

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने कहा कि मुख्यमंत्री का पद अत्यंत सम्मानित होता है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति अकाल तख्त के सामने गलत जानकारी प्रस्तुत करता है तो यह गंभीर विषय बन जाता है। उन्होंने कहा कि सिख परंपराओं और धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की असावधानी स्वीकार नहीं की जा सकती।

इस बीच अकाल तख्त ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए पंजाब के सभी सिख विधायकों को, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, 29 जून को अकाल तख्त में पेश होने के लिए तलब किया है। साथ ही पंजाब मंत्रिमंडल को भी उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि यह बुलावा राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित धर्म-अपराध और बेअदबी विरोधी कानून से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए दिया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अकाल तख्त का यह फैसला पंजाब की राजनीति पर दूरगामी असर डाल सकता है। धार्मिक और सामाजिक मुद्दों का पंजाब की राजनीति में हमेशा महत्वपूर्ण स्थान रहा है, ऐसे में मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ आया यह निर्णय राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उधर आम आदमी पार्टी की ओर से इस फैसले पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है।

अब सभी की नजर 29 जून को होने वाली उस पेशी पर टिकी है, जिसमें पंजाब के सिख विधायक और मंत्रिमंडल के सदस्य अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होंगे। माना जा रहा है कि उस दिन इस पूरे विवाद पर आगे की दिशा भी स्पष्ट हो सकती है।

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