अपराध/शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | डोडा/किश्तवाड़/फगवाड़ा | 2 अक्टूबर 2026
पंजाब के फगवाड़ा स्थित Lovely Professional University (LPU) में सितंबर में हुई हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में पंजाब पुलिस ने जम्मू-कश्मीर तक कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने डोडा से LPU के एक छात्र को गिरफ्तार किया है, जबकि किश्तवाड़ का रहने वाला एक अन्य छात्र पुलिस की गिरफ्त में आने से पहले फरार हो गया। पुलिस की टीमें अब डोडा और किश्तवाड़ में उसकी तलाश कर रही हैं।
किश्तवाड़ में दबिश, डोडा से गिरफ्तारी
पुलिस पहले किश्तवाड़ में उस छात्र के घर पहुंची, लेकिन वह वहां नहीं मिला। इसके बाद पुलिस टीम ने डोडा में उसके रिश्तेदार के घर पर भी छापा मारा। अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह वहां से निकल गया।
इसी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने डोडा से LPU के एक अन्य छात्र को गिरफ्तार कर लिया। यह छात्र विश्वविद्यालय में हिंसा के बाद कैंपस बंद होने पर अपने घर लौट आया था।
21 हजार से ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स
पुलिस के मुताबिक फरार छात्र सोशल मीडिया पर सक्रिय है और उसके इंस्टाग्राम पर 21 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
जांच में मिले वीडियो फुटेज के आधार पर पुलिस का आरोप है कि वह छात्र LPU के Dean of Students’ Welfare (DSW) भवन की ओर जाता दिखाई देता है। इसके बाद वह कुछ नकाबपोश प्रदर्शनकारियों के साथ एक इमारत में जाता हुआ कथित तौर पर दिखाई देता है, जहां बाद में CCTV कैमरों और खिड़कियों को नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई।
एक अन्य वीडियो में भी उसे विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए दिखाए जाने का पुलिस का दावा है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में संबंधित छात्र ने हिंसा में शामिल होने से इनकार किया है। उसका कहना है कि वह छात्रों को विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील करने गया था। उसने यह भी दावा किया कि एक महिला छात्र के साथ कथित तौर पर सुरक्षा गार्ड की मारपीट के बाद वह आक्रोशित हुआ था। इसलिए इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
LPU हिंसा में अब तक पांच गिरफ्तार
पुलिस की कार्रवाई अब उन लोगों तक पहुंच रही है जिनकी पहचान CCTV और दूसरे डिजिटल सबूतों के आधार पर की जा रही है।
पुलिस ने इससे पहले तीन LPU छात्रों और दो बाहरी लोगों समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। सभी को अदालत में पेश करने के बाद तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था। गिरफ्तार छात्रों में हरियाणा के सोनीपत का रहने वाला LPU छात्र और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर James Dahiya भी शामिल है।
पुलिस के अनुसार, एक मामले में करीब 40 लोगों की पहचान की गई है और इनमें से 20 लोगों के नाम FIR में दर्ज किए गए हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि पहचान में CCTV फुटेज और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की मदद ली जा रही है।
हिंसा में FIR और गंभीर धाराएं
LPU हिंसा को लेकर पुलिस ने अलग-अलग घटनाओं के संबंध में कई FIR दर्ज की हैं। इनमें कैंपस में तोड़फोड़, Uni Mall में कथित लूटपाट, NH-44 को जाम करने और पुलिस वाहनों को आग लगाने जैसे आरोपों की जांच शामिल है।
एक FIR में दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित करने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों और कुछ अज्ञात लोगों ने हाईवे पर रास्ता रोका था। इस घटना की वीडियोग्राफी भी कराई गई थी, जिसे आगे की कार्रवाई में इस्तेमाल किया जा रहा है।
कथित रेप की खबर से शुरू हुआ था विवाद
LPU में 27 सितंबर को उस समय तनाव बढ़ गया था जब सोशल मीडिया पर एक छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न की खबर तेजी से फैल गई। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि कैंपस में एक बाहरी व्यक्ति ने छात्रा के साथ यौन हमला किया है।
इसके बाद विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। कैंपस में तोड़फोड़ हुई, कुछ वाहनों को आग लगाई गई, दुकानों को नुकसान पहुंचा और जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग भी बाधित हुआ।
हालांकि, विश्वविद्यालय ने इस घटना को बेबुनियाद और अफवाह बताया था। पुलिस की शुरुआती जांच में भी कथित घटना की पुष्टि नहीं हुई थी और संबंधित छात्राओं की ओर से भी घटना से इनकार किए जाने की बात सामने आई थी। मामले की जांच के लिए पुलिस ने SIT गठित की थी।
सोशल मीडिया की भूमिका पर भी जांच
इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर तेजी से फैली अपुष्ट सूचनाएं जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अफवाह सबसे पहले कहां से फैली और किस तरह देखते ही देखते बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंची।
जांचकर्ताओं के सामने यह सवाल भी है कि एक अपुष्ट सूचना इतनी तेजी से बड़े छात्र प्रदर्शन और फिर हिंसा में कैसे बदल गई। पंजाब की दो निजी यूनिवर्सिटी में हुए हालिया घटनाक्रम में सोशल मीडिया पर फैली अपुष्ट सूचनाओं और उसके बाद हिंसक प्रदर्शन के बीच समानता भी जांच के दायरे में है।
कैंपस में 7,400 से ज्यादा CCTV कैमरे
LPU परिसर में 7,400 से अधिक CCTV कैमरे और 200 से ज्यादा सुरक्षा कर्मी होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में पुलिस जांच में CCTV फुटेज को महत्वपूर्ण सबूत माना जा रहा है। हिंसा के बाद इन्हीं फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान आगे बढ़ाई गई।
हिंसा के बाद विश्वविद्यालय ने 10 दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित कर दी थीं और मिड-टर्म परीक्षाएं भी आगे बढ़ा दी गई थीं। बड़ी संख्या में छात्र अपने घर लौट गए थे।
‘बाहरी लोगों’ को लेकर भी स्थिति साफ
हिंसा के दौरान कैंपस में वॉकी-टॉकी लेकर घूम रहे कुछ लोगों को लेकर भी सवाल उठे थे। बाद में पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया कि वे लोग बाहरी उपद्रवी नहीं, बल्कि भारतीय सेना के अधिकारी और पैराशूट रेजिमेंट की स्पेशल फोर्सेज बटालियन के कर्मी थे। पुलिस के मुताबिक, उनकी पहचान पूछताछ के बाद हुई थी और वे एक सैन्य अधिकारी के बच्चे को लेने के सिलसिले में वहां पहुंचे थे।
अब पंजाब पुलिस की जांच का फोकस फरार छात्र और अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी, CCTV व डिजिटल साक्ष्यों की जांच तथा हिंसा, तोड़फोड़ और हाईवे जाम में प्रत्येक व्यक्ति की कथित भूमिका तय करने पर है। किसी भी आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।



