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लेबनान : इजरायली हमलों में 16 की मौत, तेल की कीमतें 120 डॉलर पार

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अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी / ABC NATIONAL NEWS | तेल अवीव/बेरूत/वॉशिंगटन | 30 अप्रैल 2026

मिडिल ईस्ट में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। इजरायल और उसके विरोधी गुटों के बीच टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। इन हमलों ने इलाके में पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है, जबकि हाल ही में संघर्ष विराम की बात भी सामने आई थी।

इजरायली सेना ने एक दिन के भीतर बड़े पैमाने पर सैन्य तैयारी भी दिखाई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले 24 घंटों में करीब 6500 टन सैन्य उपकरण और हथियार देश में लाए गए हैं। यह संकेत है कि इजरायल किसी भी स्थिति के लिए खुद को पूरी तरह तैयार रख रहा है।

इस बीच उत्तरी इजरायल में हिज्बुल्लाह के ड्रोन हमले की भी खबर है, जिसमें 12 सैनिक घायल हो गए। इससे साफ है कि जमीन और आसमान दोनों मोर्चों पर टकराव जारी है। वहीं एक इजरायली सैनिक की मौत की भी पुष्टि हुई है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।

समुद्र में भी घटनाएं तेजी से बदल रही हैं। गाजा की ओर जा रहे फ्लोटिला के करीब 175 एक्टिविस्टों को इजरायल ने हिरासत में लिया था, जिन्हें अब ग्रीस भेजने का फैसला किया गया है। इस कदम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं और कई देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

इस पूरे संघर्ष का असर अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिससे कई देशों में ईंधन महंगा हो रहा है। खासतौर पर गरीब और विकासशील देशों पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है। सोमालिया जैसे देशों में खाद्य और ईंधन की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, जिससे भुखमरी का खतरा फिर बढ़ गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से स्थिति और बिगड़ गई है। यह रास्ता दुनिया के तेल सप्लाई का अहम हिस्सा है। यहां रुकावट आने से कई जहाज फंस गए हैं और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।

इजरायल के भीतर भी इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ रही है। खासकर उत्तरी इलाकों में रहने वाले लोग इस संघर्ष से थक चुके हैं और इसे लंबा खिंचता देख डर का माहौल है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो यह संघर्ष और जटिल हो सकता है।

मौजूदा हालात यह दिखा रहे हैं कि यह टकराव सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है—चाहे वह तेल की कीमत हो, खाद्य संकट हो या वैश्विक सुरक्षा का सवाल। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

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