विदेश | लुबना आबिदी | ABC NATIONAL NEWS | लंदन | 10 मई 2026
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को मिली बड़ी हार के बावजूद साफ कर दिया है कि वह इस्तीफा नहीं देंगे और पद पर बने रहेंगे। हालिया स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को दशकों की सबसे बड़ी हारों में से एक का सामना करना पड़ा है, जिसके बाद पार्टी के अंदर ही स्टारमर के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं।
बीबीसी से बातचीत में स्टारमर ने कहा कि वह देश को “अराजकता” में नहीं धकेलना चाहते और उनका उद्देश्य अब पार्टी को दोबारा मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि यह समय पीछे हटने का नहीं बल्कि जनता का भरोसा फिर से जीतने का है। स्टारमर ने यह भी माना कि चुनावी नतीजे लेबर पार्टी के लिए गंभीर चेतावनी हैं, लेकिन उन्होंने इसे बदलाव और सुधार का अवसर बताया।
इन चुनावों में सबसे बड़ा फायदा एंटी-इमिग्रेशन पार्टी Reform UK को हुआ, जिसने इंग्लैंड के कई स्थानीय परिषद क्षेत्रों में बड़ी बढ़त हासिल की। वहीं वेल्स में Plaid Cymru ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए लेबर पार्टी के लंबे वर्चस्व को तोड़ दिया। स्कॉटलैंड में Scottish National Party सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी।
ब्रिटेन में लगातार गिरते जीवन स्तर, महंगाई और धीमी आर्थिक सुधारों को लेकर जनता की नाराजगी का असर इन चुनावों में साफ दिखाई दिया। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टारमर सरकार जनता की उम्मीदों पर तेजी से खरा नहीं उतर सकी, जिसका नुकसान पार्टी को भुगतना पड़ा।
लेबर पार्टी के भीतर भी असंतोष बढ़ने लगा है। पूर्व मंत्री कैथरीन वेस्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अब समय आ गया है कि स्टारमर पार्टी नेतृत्व छोड़ दें। हालांकि पार्टी नेतृत्व फिलहाल सार्वजनिक रूप से स्टारमर के समर्थन में दिखाई दे रहा है।
इस बीच स्टारमर ने बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन को “ग्लोबल फाइनेंस एंड कोऑपरेशन” के लिए विशेष दूत नियुक्त किया है। गॉर्डन ब्राउन को 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था को संभालने में अहम भूमिका निभाने का श्रेय दिया जाता है। माना जा रहा है कि स्टारमर आर्थिक मोर्चे पर भरोसा मजबूत करने के लिए अनुभवी चेहरों को आगे ला रहे हैं।
ब्रिटिश सरकार के मुताबिक गॉर्डन ब्राउन अब ऐसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय साझेदारी मॉडल तैयार करेंगे, जो रक्षा, सुरक्षा और यूरोप के साथ ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों को मजबूत कर सकें।
हालांकि स्थानीय चुनावों का असर सीधे ब्रिटेन की संसद या सरकार पर नहीं पड़ेगा, लेकिन इन नतीजों ने साफ संकेत दे दिया है कि जनता के बीच स्टारमर की लोकप्रियता पर दबाव बढ़ रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि लेबर पार्टी इस असंतोष को संभाल पाती है या फिर ब्रिटेन की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।




