राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 10 जुलाई 2026
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को निर्देश दिया है कि सीमा से लगे क्षेत्रों में यदि अवैध घुसपैठ या अन्य असामान्य कारणों से जनसंख्या में बदलाव दिखाई दे, तो उसकी जानकारी बिना देरी किए गांव स्तर से लेकर केंद्र सरकार तक पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि सरकार “असामान्य कारणों” से होने वाली “अप्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि” को रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में “निर्मम (Ruthless) दृष्टिकोण” अपनाया जाएगा।
नई दिल्ली में आयोजित लैंड बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट्स एसपी कॉन्फ्रेंस-2026 को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि स्थानीय पुलिस की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं जनसंख्या का स्वरूप असामान्य तरीके से बदल रहा है, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित एजेंसियों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस विषय का गहराई से अध्ययन करने के लिए एक ‘डेमोग्राफी मिशन’ भी गठित किया है। यह मिशन सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या के बदलते पैटर्न, उसके कारणों और उससे जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों का अध्ययन करेगा। इसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
अमित शाह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि अवैध घुसपैठ, सीमा पार से होने वाली गतिविधियां और जनसांख्यिकीय बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर विषय हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित न रहें, बल्कि सीमा क्षेत्रों में सामाजिक और जनसंख्या संबंधी बदलावों पर भी सतर्क निगरानी रखें।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती जिलों की पुलिस को स्थानीय प्रशासन, खुफिया एजेंसियों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना होगा। किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अवैध दस्तावेज, फर्जी पहचान या असामान्य जनसंख्या वृद्धि के मामलों में तुरंत कार्रवाई और रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जानी चाहिए।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि सीमा सुरक्षा का अर्थ केवल सीमा की निगरानी नहीं है, बल्कि तस्करी, अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क, मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण रखना है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से आधुनिक तकनीक, डेटा विश्लेषण और स्थानीय सूचना तंत्र का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया।
सरकार का मानना है कि यदि सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या का स्वरूप अचानक बदलता है, तो उसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। ऐसे मामलों में तथ्यों की जांच कर समय रहते कार्रवाई करना राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जनसंख्या संबंधी सूचनाओं के त्वरित संकलन और विश्लेषण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं कई देशों से लगती हैं, जहां अवैध घुसपैठ, सीमा पार अपराध और तस्करी जैसी चुनौतियां समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में स्थानीय पुलिस को अधिक सक्रिय भूमिका देने की सरकार की रणनीति सीमा प्रबंधन को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अमित शाह के इस बयान को सरकार की सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा नीति का अहम संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या के पैटर्न, अवैध प्रवासन और सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी और अधिक सख्त होने की संभावना है।




