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BSNL का सैटेलाइट फोन लॉन्च, कीमत ₹1.34 लाख; जानिए कौन खरीद सकता है, कैसे करेगा काम और क्यों हैं इस पर सख्त नियम

टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 10 जुलाई 2026

दूर-दराज़ इलाकों के लिए BSNL की नई पहल

सरकारी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने ऐसे इलाकों के लिए नया सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है, जहाँ सामान्य मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह फेल हो जाते हैं। कंपनी ने इस फोन की कीमत 1,34,166 रुपये (सभी टैक्स सहित) तय की है। BSNL का कहना है कि यह फोन खास तौर पर उन परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया है, जहाँ मोबाइल टावर उपलब्ध नहीं होते और संचार बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। कंपनी ने इसे रक्षा सेवाओं, समुद्री क्षेत्रों, आपदा राहत कार्यों, खनन उद्योग, दूरस्थ इलाकों में काम करने वाली एजेंसियों और एडवेंचर गतिविधियों के लिए एक भरोसेमंद संचार साधन बताया है।

आखिर सैटेलाइट फोन होता क्या है और यह सामान्य मोबाइल से कैसे अलग है?

सामान्य मोबाइल फोन नजदीकी मोबाइल टावर से सिग्नल लेकर काम करता है। लेकिन सैटेलाइट फोन सीधे अंतरिक्ष में मौजूद संचार उपग्रहों (सैटेलाइट) से जुड़ता है। यही वजह है कि जहाँ मोबाइल नेटवर्क बिल्कुल नहीं होता, जैसे ऊँचे पहाड़, घने जंगल, समुद्र के बीच, रेगिस्तान या आपदा प्रभावित क्षेत्र, वहाँ भी इस फोन से बातचीत की जा सकती है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जब मोबाइल नेटवर्क ठप पड़ जाते हैं, तब भी सैटेलाइट फोन काम करता रहता है। इसी कारण इसे सुरक्षा एजेंसियों और राहत कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्या-क्या सुविधाएँ मिलेंगी?

BSNL के अनुसार इस सैटेलाइट फोन में कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ दी गई हैं। यह सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से जुड़कर किसी भी स्थान से वॉयस कॉल करने की सुविधा देता है। फोन में इमरजेंसी सपोर्ट सिस्टम मौजूद है, जिससे संकट की स्थिति में तुरंत संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा लंबी बैटरी लाइफ दी गई है ताकि लंबे समय तक बिजली उपलब्ध न होने पर भी इसका उपयोग किया जा सके। कंपनी का दावा है कि कठिन परिस्थितियों में भी यह फोन भरोसेमंद संचार उपलब्ध कराएगा।

हर कोई नहीं खरीद सकता यह फोन

हालाँकि यह फोन बाजार में लॉन्च हो गया है, लेकिन इसे कोई भी व्यक्ति सामान्य मोबाइल की तरह खरीदकर इस्तेमाल नहीं कर सकता। भारत में सैटेलाइट फोन का उपयोग कड़े नियमों के तहत होता है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सेना, अर्धसैनिक बलों, सीमा सुरक्षा एजेंसियों, समुद्री जहाजों, खनन कंपनियों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और अधिकृत सरकारी या औद्योगिक संस्थानों तक सीमित है। यदि किसी व्यक्ति या संस्था को इसकी आवश्यकता है तो उसे BSNL के अधिकृत कार्यालय से संपर्क करना होगा और आवश्यक सरकारी अनुमति प्राप्त करनी होगी।

भारत में इतने सख्त नियम क्यों हैं?

भारत में सैटेलाइट फोन के उपयोग पर राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण सख्त नियंत्रण रखा गया है। टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के अनुसार बिना दूरसंचार विभाग (DoT) की अनुमति या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के सैटेलाइट फोन रखना या चलाना गैरकानूनी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यह फोन स्थानीय मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर नहीं होता, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसकी निगरानी और कॉल ट्रैक करना सामान्य मोबाइल की तुलना में कहीं अधिक कठिन होता है।

26/11 मुंबई हमलों के बाद और कड़े हुए नियम

सैटेलाइट फोन को लेकर भारत ने सबसे सख्त कदम 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद उठाए थे। जांच में सामने आया था कि आतंकवादियों ने थुराया (Thuraya) सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में बैठे अपने संचालकों से लगातार संपर्क बनाए रखा था। क्योंकि ये कॉल सामान्य मोबाइल नेटवर्क से नहीं गुजरती थीं, इसलिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए उन्हें तुरंत ट्रैक करना मुश्किल हो गया था। इसके बाद सरकार ने सैटेलाइट फोन के इस्तेमाल पर कड़े नियम लागू कर दिए और आज भी जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों में ऐसे उपकरणों को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाती है।

विदेशी यात्रियों के लिए भी हैं विशेष नियम

यदि कोई विदेशी नागरिक अपने साथ सैटेलाइट फोन लेकर भारत आता है तो उसे हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग में इसकी घोषणा करना अनिवार्य होता है। ऐसा न करने पर फोन जब्त किया जा सकता है, भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे कई देशों ने भी अपने नागरिकों को भारत यात्रा के दौरान सैटेलाइट फोन से जुड़े नियमों की जानकारी पहले से देने की सलाह जारी कर रखी है।

आपदा और सुरक्षा के समय बन सकता है जीवनरक्षक

BSNL का मानना है कि यह नया सैटेलाइट फोन केवल एक संचार उपकरण नहीं, बल्कि आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक तकनीक साबित हो सकता है। जब बाढ़, भूकंप, चक्रवात या किसी अन्य कारण से मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो जाते हैं, तब सैटेलाइट फोन ही संपर्क का सबसे भरोसेमंद माध्यम बनता है। यही वजह है कि सरकार इस तकनीक का विस्तार तो कर रही है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसके उपयोग पर कड़ी निगरानी भी बनाए रख रही है।

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