अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | दोहा | 12 मई 2026
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच कतर के पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व विदेश मंत्री शेख हमद बिन जासिम अल थानी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। अल जज़ीरा को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि नेतन्याहू “युद्ध की आग” का इस्तेमाल पूरे मध्य पूर्व को अपनी रणनीति के मुताबिक दोबारा ढालने के लिए कर रहे हैं। पूर्व कतर पीएम ने कहा कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किया गया युद्ध कोई अचानक हुआ घटनाक्रम नहीं, बल्कि दशकों से तैयार की जा रही एक रणनीति का हिस्सा है। उनका आरोप है कि नेतन्याहू लंबे समय से अमेरिका को ईरान के खिलाफ बड़े युद्ध में धकेलने की कोशिश करते रहे हैं और अब जाकर उन्हें इसमें सफलता मिली। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू ने अमेरिकी प्रशासन को यह “भ्रम” दिया कि ईरान पर हमला छोटा और तेज़ युद्ध होगा और कुछ ही हफ्तों में तेहरान की सत्ता गिर जाएगी। लेकिन हालात इसके उलट होते दिखाई दे रहे हैं। पूर्व कतर पीएम के मुताबिक, यह युद्ध अब पूरे क्षेत्र की स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन चुका है।
“सबसे बड़ा खतरा अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य”
शेख हमद बिन जासिम ने कहा कि युद्ध का सबसे खतरनाक परिणाम अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट बन चुका है। उनका कहना है कि ईरान अब इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को लगभग अपने नियंत्रण क्षेत्र की तरह इस्तेमाल कर रहा है। यही रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल पहुंचाने का प्रमुख मार्ग माना जाता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह संकट और बढ़ा तो पूरी दुनिया में तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर भारी असर पड़ सकता है। उनके अनुसार, “ईरान का परमाणु कार्यक्रम जितना खतरनाक नहीं, उससे ज्यादा खतरनाक अब हॉर्मुज संकट बन चुका है।”
“गल्प देशों को सबसे ज्यादा नुकसान”
पूर्व कतर पीएम ने कहा कि इस युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान खाड़ी देशों को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के नाम पर खाड़ी देशों के ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे पर भी हमले किए, जबकि कई गल्फ देशों ने इस युद्ध का विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी राजनीतिक साख काफी हद तक खो दी है और आम लोगों में भी नाराजगी बढ़ी है।
“नेतन्याहू का ‘ग्रेटर इजरायल’ एजेंडा”
इंटरव्यू में शेख हमद ने सबसे बड़ा आरोप यह लगाया कि नेतन्याहू इस पूरे युद्ध का इस्तेमाल “ग्रेटर इजरायल” की अवधारणा को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल के कट्टरपंथी गुट लंबे समय से मध्य पूर्व में नई क्षेत्रीय व्यवस्था चाहते हैं और मौजूदा युद्ध उसी दिशा में एक कदम है।
उन्होंने कहा कि नेतन्याहू युद्ध और अस्थिरता के माहौल का इस्तेमाल जबरन क्षेत्रीय गठबंधन बनाने और अरब देशों पर दबाव बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।
“गल्प NATO बनाने की जरूरत”
पूर्व कतर पीएम ने खाड़ी देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि उनका सबसे बड़ा खतरा बाहरी ताकतें नहीं, बल्कि आपसी बिखराव है। उन्होंने एक संयुक्त “गल्प NATO” बनाने की वकालत की, जिसमें खाड़ी देशों की साझा रक्षा और राजनीतिक रणनीति हो।
उन्होंने कहा कि अमेरिका पर हमेशा सुरक्षा के लिए निर्भर रहना अब संभव नहीं है क्योंकि वॉशिंगटन का फोकस एशिया और चीन की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में गल्फ देशों को तुर्किये, पाकिस्तान और मिस्र जैसे क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मजबूत रणनीतिक रिश्ते बनाने चाहिए।
गाजा युद्ध पर भी तीखी टिप्पणी
शेख हमद बिन जासिम ने गाजा में जारी इजरायली कार्रवाई को “नैतिक और राजनीतिक आपदा” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा को खाली कराने और फिलिस्तीनियों को बाहर धकेलने की कोशिशें चल रही हैं। उन्होंने कहा कि “गाजा को एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट की तरह देखा जा रहा है।”
उन्होंने फिलिस्तीन मुद्दे पर सऊदी अरब के रुख की भी तारीफ की और कहा कि रियाद ने फिलिस्तीनी राज्य के स्पष्ट रोडमैप के बिना इजरायल से संबंध सामान्य करने से इनकार करके नेतन्याहू की रणनीति को बड़ा झटका दिया है।
इस इंटरव्यू के बाद मध्य पूर्व की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। कतर के पूर्व प्रधानमंत्री के बयान ऐसे समय आए हैं जब ईरान-इजरायल युद्ध, तेल संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर टिकी हुई हैं।




