[the_ad id="179"]
Home » International » हॉर्मुज पर ईरान का दावा, पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक बिसात; अमेरिका-ईरान वार्ता आगे बढ़ी, लेबनान-इज़राइल बातचीत शुरू

हॉर्मुज पर ईरान का दावा, पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक बिसात; अमेरिका-ईरान वार्ता आगे बढ़ी, लेबनान-इज़राइल बातचीत शुरू

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | 23 जून 2026

पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी तनाव के बीच कूटनीति ने एक नया मोड़ ले लिया है। स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई तकनीकी वार्ताओं के बाद दोनों देशों ने आगे की बातचीत के लिए चार कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई है। वहीं, लेबनान और इज़राइल के बीच भी वॉशिंगटन में प्रत्यक्ष वार्ता का नया दौर शुरू हो रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग — हॉर्मुज जलडमरूमध्य — बना हुआ है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने दावा किया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य का प्रशासन ईरान के नियंत्रण में रहेगा और युद्ध-पूर्व स्थिति अब वापस नहीं आएगी। इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों और समुद्री व्यापार जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

दूसरी ओर भारत ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने का स्वागत किया है। नई दिल्ली में ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि इस समुद्री मार्ग पर नौवहन की स्वतंत्रता क्षेत्रीय और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे सकारात्मक और स्वागतयोग्य कदम बताया।

स्विट्जरलैंड में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान चार प्रमुख कार्य समूह गठित करने का निर्णय लिया गया है। इनमें प्रतिबंध हटाने, परमाणु मामलों, पुनर्निर्माण एवं आर्थिक विकास तथा निगरानी एवं क्रियान्वयन से जुड़े विषय शामिल हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह पहली बार है जब युद्धविराम के बाद दोनों पक्ष इतने विस्तृत ढांचे पर सहमत हुए हैं।

हालांकि वार्ता के समानांतर मतभेद भी जारी हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी क्षतिग्रस्त परमाणु सुविधाओं का अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) द्वारा तत्काल निरीक्षण कराने की कोई योजना नहीं है। तेहरान का कहना है कि वह परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों का पालन करता रहेगा, लेकिन अतिरिक्त निरीक्षण के लिए कोई नया प्रोटोकॉल तय नहीं हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता तो अमेरिका आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखने के लिए आपसी सम्मान सबसे महत्वपूर्ण होगा।

इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो खाड़ी देशों के दौरे पर हैं। उनका प्रयास है कि संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे देशों को अमेरिका-ईरान समझौते के प्रति आश्वस्त किया जाए। खाड़ी देशों को चिंता है कि ईरान को दी जा रही रियायतें भविष्य में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।

लेबनान और इज़राइल के बीच शुरू हो रही नई वार्ता भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अप्रैल से अब तक दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन स्थायी युद्धविराम नहीं हो पाया। अब उम्मीद की जा रही है कि अमेरिका-ईरान समझौते के बाद क्षेत्रीय तनाव कम होगा और लेबनान सीमा पर भी स्थिरता लौट सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया अभी पूरी तरह संकट से बाहर नहीं निकला है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान पर लगे प्रतिबंध, परमाणु कार्यक्रम और लेबनान-इज़राइल संघर्ष जैसे मुद्दे अब भी जटिल बने हुए हैं। फिर भी, युद्ध की भाषा से बातचीत की ओर बढ़ते कदम इस क्षेत्र के लिए राहत की खबर माने जा रहे हैं।

दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि अगले 60 दिनों में अमेरिका और ईरान की वार्ता किस दिशा में जाती है। यदि यह प्रक्रिया सफल होती है तो पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *