अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 12 जून 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अमेरिका को स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। भारतीय नाविकों वाले तीन वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई में तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बाद नई दिल्ली ने वॉशिंगटन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत ने साफ कहा है कि भारतीय समुद्री कर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे हमले तत्काल बंद होने चाहिए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा कि पिछले चार दिनों में ओमान तट के निकट भारतीय चालक दल वाले तीन व्यापारिक जहाज अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का निशाना बने। इनमें भारतीय नागरिक हताहत हुए हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही ‘सेत्तेबेलो’ नामक जहाज पर हमला हुआ, भारत ने अमेरिकी पक्ष के सामने तत्काल और कड़ा विरोध दर्ज कराया।
यह पहली बार है जब भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि भारतीय नाविकों की मौजूदगी वाले जहाज अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की चपेट में आए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने समुद्री समुदाय के कल्याण और सुरक्षा को अत्यंत गंभीरता से लेता है और निर्दोष नागरिकों की जान जाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं।
ओमान के निकट हुए हमलों में जिन जहाजों को निशाना बनाया गया, वे पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और समुद्री नाकेबंदी के बीच विवाद के केंद्र में आ गए हैं। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य और उससे जुड़े समुद्री मार्गों पर स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है।
भारतीय अधिकारियों के अनुसार हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई है, जबकि अन्य भारतीय चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित परिवारों के संपर्क में है।
भारत का यह कड़ा रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच हाल के वर्षों में रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। इसके बावजूद भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के मामले में वह किसी भी देश के समक्ष अपनी चिंता और विरोध दर्ज कराने से पीछे नहीं हटेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया संघर्ष के व्यापक प्रभावों को भी उजागर करता है। युद्ध और सैन्य तनाव का सबसे बड़ा असर अक्सर उन आम नागरिकों और कर्मचारियों पर पड़ता है जिनका संघर्ष से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता। समुद्री व्यापार में कार्यरत हजारों भारतीय नाविक इस समय क्षेत्र में काम कर रहे हैं और उनकी सुरक्षा भारत सरकार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है।
संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पहले ही पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य टकराव पर चिंता जता चुकी हैं। भारत लगातार संवाद और कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है। नई दिल्ली का मानना है कि क्षेत्र में स्थिरता और समुद्री सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत आवश्यक है।
भारत की ओर से अमेरिका को भेजा गया यह सख्त संदेश स्पष्ट संकेत देता है कि भारतीय नागरिकों की जान से जुड़े मामलों पर सरकार किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं करेगी। तीन भारतीय नाविकों की मौत ने न केवल देश को झकझोर दिया है बल्कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की मानवीय कीमत को भी सामने ला दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अमेरिका इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया देता है और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




