विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी/ अंतरिक्ष | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 2 जुलाई 2026
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण आने वाला है। देश का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट ‘विक्रम-1’ अब अपनी पहली उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है। हैदराबाद स्थित निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने घोषणा की है कि ‘मिशन आगमन’ नाम से होने वाली विक्रम-1 की पहली परीक्षण उड़ान के लिए 12 जुलाई से 4 अगस्त 2026 के बीच लॉन्च विंडो निर्धारित की गई है।
विक्रम-1 का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा। यह भारत का पहला निजी रूप से विकसित ऑर्बिटल-क्लास लॉन्च व्हीकल होगा, जो देश के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इस मिशन का उद्देश्य केवल रॉकेट का परीक्षण करना नहीं है, बल्कि यह साबित करना भी है कि भारत की निजी कंपनियां अब उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में भेजने जैसी जटिल अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने में सक्षम हैं। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो भारत वैश्विक कमर्शियल स्पेस लॉन्च बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
स्काईरूट एयरोस्पेस पहले भी छोटे रॉकेटों के सफल परीक्षण कर चुकी है, लेकिन विक्रम-1 कंपनी का पहला पूर्ण ऑर्बिटल रॉकेट है। इसकी सफलता भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग, स्टार्टअप इकोसिस्टम और अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद कई स्टार्टअप इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़े हैं। विक्रम-1 का प्रक्षेपण इसी नई अंतरिक्ष नीति और निजी भागीदारी का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
यदि मिशन आगमन सफल रहता है, तो भारत न केवल सरकारी बल्कि निजी अंतरिक्ष प्रक्षेपण क्षमता रखने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में और मजबूती से अपनी पहचान स्थापित करेगा।




