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ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीयों को बड़ा झटका, ट्रंप प्रशासन का नया नियम — पहले अमेरिका छोड़ो, फिर मिलेगी एंट्री

अंतरराष्ट्रीय / अमेरिका | अमित भास्कर | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 23 मई 2026

अमेरिका में ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे लाखों भारतीयों के लिए ट्रंप प्रशासन का नया इमिग्रेशन प्रस्ताव बड़ी चिंता बन गया है। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, जो विदेशी नागरिक फिलहाल अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं और ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें प्रक्रिया पूरी होने तक अमेरिका छोड़कर अपने देश लौटना पड़ सकता है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) ने इमिग्रेशन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्थायी वीजा से स्थायी निवास (Permanent Residency) में बदलाव की प्रक्रिया सामान्य तौर पर अमेरिका के बाहर पूरी कराई जाए। इसका मतलब यह हुआ कि H-1B, F-1, J-1, B1/B2 और अन्य अस्थायी वीजा पर रह रहे लोगों को ग्रीन कार्ड जारी होने से पहले अपने मूल देश लौटना पड़ सकता है।

इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारतीय पेशेवरों, आईटी कर्मचारियों, छात्रों और लंबे समय से अमेरिका में काम कर रहे परिवारों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भारतीयों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा अवधि पहले ही कई वर्षों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में यदि लोगों को अमेरिका छोड़कर भारत लौटना पड़ा, तो इससे नौकरी, बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

USCIS के निदेशक जोसेफ एडलो ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन “टेम्पररी एंट्री” और “परमानेंट रेजिडेंस” के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना चाहता है। उनके अनुसार, जो लोग स्थायी रूप से अमेरिका में बसना चाहते हैं, उन्हें अपने देश से ही इमिग्रेंट वीजा प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।

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हालांकि दस्तावेजों में यह भी कहा गया है कि “असाधारण परिस्थितियों” में कुछ लोगों को अमेरिका में रहकर ही स्टेटस एडजस्टमेंट की अनुमति दी जा सकती है। लेकिन सामान्य नियम के तौर पर प्रक्रिया विदेश से पूरी करने पर जोर दिया गया है।

इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह नीति पूरी तरह लागू होती है, तो लाखों भारतीयों के सामने कानूनी और व्यावहारिक संकट खड़ा हो सकता है। कई भारतीय परिवार वर्षों से अमेरिका में रह रहे हैं, उनके बच्चे वहीं पढ़ रहे हैं और उनका पूरा आर्थिक जीवन अमेरिका से जुड़ा हुआ है। ऐसे में देश छोड़कर वापस जाना आसान नहीं होगा।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस फैसले से अमेरिकी टेक उद्योग और हेल्थ सेक्टर पर असर पड़ सकता है, क्योंकि इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर काम करते हैं। कई कंपनियों को कुशल कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रंप प्रशासन पहले भी कड़े इमिग्रेशन रुख के लिए जाना जाता रहा है। “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत अवैध आव्रजन के साथ-साथ कानूनी इमिग्रेशन प्रक्रियाओं को भी सख्त बनाने की कोशिशें लगातार की गई हैं।

भारतीय समुदाय और इमिग्रेशन अधिकार समूहों ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे उन लोगों को दंडित किया जा रहा है जो वर्षों से कानूनी प्रक्रिया के तहत अमेरिका में रह रहे हैं और टैक्स भी दे रहे हैं।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या यह प्रस्ताव अंतिम नीति के रूप में लागू होता है या फिर कानूनी चुनौतियों और राजनीतिक दबाव के बाद इसमें बदलाव किया जाएगा।

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