राष्ट्रीय/ अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 23 सितंबर 2026
कश्मीर मुद्दे पर भारत ने Organisation of Islamic Cooperation यानी OIC को कड़ा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र के दौरान 22 सितंबर को OIC के जम्मू-कश्मीर संपर्क समूह की बैठक हुई, जिसमें अजरबैजान, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये शामिल हुए। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कश्मीर का जिक्र किया गया, जिसे भारत ने बुधवार को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।
विदेश मंत्रालय ने OIC के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामले भारत के आंतरिक मामले हैं और OIC को इन पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्रशासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं।
भारत ने यह भी कहा कि बार-बार राजनीतिक प्रचार को दोहराने से वास्तविकता नहीं बदल सकती। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस तरह के बयानों का लगातार समर्थन OIC की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
OIC संपर्क समूह की बैठक ऐसे समय हुई जब दुनिया का ध्यान संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र पर है। समूह में पाकिस्तान के साथ अजरबैजान, सऊदी अरब और तुर्किये भी शामिल हैं। बैठक में जम्मू-कश्मीर से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई और इसके बाद संयुक्त बयान जारी किया गया।
भारत ने इस बयान को स्वीकार करने के बजाय सीधे उसकी बुनियाद पर सवाल उठाया। विदेश मंत्रालय का कहना है कि OIC को ऐसे मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है जो भारत के आंतरिक प्रशासन और संप्रभुता से जुड़े हैं। भारत का रुख लगातार यह रहा है कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित विषय भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दे हैं और किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार्य नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने OIC के लगातार ऐसे बयानों पर भी सवाल उठाया। भारत के अनुसार, जब कोई संगठन बार-बार एक ही राजनीतिक नैरेटिव को समर्थन देता है, तो उसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इस बार भी भारत ने अपनी प्रतिक्रिया में इसी पहलू को प्रमुखता से उठाया।
भारत और OIC के बीच कश्मीर को लेकर मतभेद नया नहीं है। OIC पहले भी जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर बयान देता रहा है और भारत ऐसे बयानों को खारिज करता रहा है। इस बार भारत की प्रतिक्रिया में विशेष रूप से यह बात सामने आई कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर भारत अपने संवैधानिक और प्रशासनिक दावे पर किसी बाहरी संगठन की टिप्पणी को स्वीकार नहीं करता।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह OIC के जम्मू-कश्मीर संपर्क समूह का सदस्य है और लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दा उठाता रहा है। भारत पाकिस्तान पर कश्मीर के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाता रहा है, जबकि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने अलग दावे रखता है।
भारत की ओर से बुधवार को दिया गया संदेश हालांकि बिल्कुल स्पष्ट था—कश्मीर पर बाहरी राजनीतिक दबाव या किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन के बयान से भारत के रुख में बदलाव नहीं होगा। विदेश मंत्रालय ने अपने जवाब में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताते हुए OIC के बयान को खारिज कर दिया।
इस पूरे विवाद के बीच एक बात फिर साफ हो गई है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक मतभेद जारी हैं। भारत जहां इसे अपने आंतरिक मामले के रूप में देखता है, वहीं पाकिस्तान और OIC के कुछ सदस्य इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाते रहे हैं।
भारत का संदेश इस बार भी सीधा है—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय दावे पर किसी बाहरी संगठन के राजनीतिक बयान से कोई बदलाव नहीं होगा। OIC की टिप्पणी के जवाब में विदेश मंत्रालय ने न केवल बयान को खारिज किया, बल्कि संगठन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठा दिया है।



