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UNGA में ईरान का जोरदार संदेश, मीनाब स्कूल पीड़ितों की तस्वीर दिखाते ही अमेरिकी दूत बाहर निकले

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | न्यूयॉर्क | 23 सितंबर 2026

 

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में बुधवार को ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर सीधे दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक मंच पर दिखाई दिया। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने UNGA में अपने संबोधन के दौरान मीनाब के उस स्कूल में मारे गए बच्चों की तस्वीरें दिखाईं, जिस पर फरवरी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई हुई थी। ईरान ने इस घटना को युद्ध में आम नागरिकों और बच्चों की मौत का बड़ा उदाहरण बताया है। पेजेशकियन का यह संबोधन ऐसे समय हुआ जब एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया था।

मीनाब के शाजरेह तैयबेह प्राथमिक स्कूल पर 28 फरवरी को हुए हमले को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच गंभीर मतभेद हैं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार इस हमले में बड़ी संख्या में बच्चे और शिक्षक मारे गए। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। अल जजीरा के अनुसार ईरान के मीनाब स्कूल हमले में 175 लोगों की मौत हुई, जिनमें 47 छात्राएं और 26 शिक्षक शामिल थे, जबकि CNN की रिपोर्ट में कम से कम 120 छात्रों और 26 शिक्षकों के मारे जाने की जानकारी दी गई।

ईरान इस घटना को अपनी UNGA कूटनीति का प्रमुख हिस्सा बनाकर न्यूयॉर्क पहुंचा था। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पहले ही संकेत दिया था कि पेजेशकियन अपने भाषण में मीनाब स्कूल के पीड़ितों और युद्ध में मारे गए अन्य नागरिकों का मुद्दा उठाएंगे। ईरान का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र का मंच उसके लिए अपने नागरिकों की स्थिति और युद्ध के दौरान हुई घटनाओं को दुनिया के सामने रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

पेजेशकियन का भाषण ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाओं के संकेत भी सामने आए हैं। ट्रंप ने मंगलवार को UNGA में ईरान के सामने एक समझौते और सैन्य कार्रवाई के बीच चुनाव की बात कही थी। उन्होंने ईरान के खिलाफ बेहद कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बाद अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच UNGA से इतर बातचीत होने की भी खबर सामने आई। हालांकि दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर अभी कोई अंतिम समझौता सामने नहीं आया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच UNGA में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के बीच तनाव भी दिखाई दिया। इससे पहले ट्रंप के भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के ज्यादातर सदस्य सदन से बाहर चले गए थे। ईरान की ओर से बाद में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र का मंच छोड़ना उसके लिए अपने पक्ष को दुनिया के सामने रखने का अवसर गंवाने जैसा होता।

पश्चिम एशिया का संघर्ष इस साल UNGA के सबसे बड़े मुद्दों में शामिल है। अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उठाए गए कदमों का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर भी पड़ा है। लाल सागर और बाब-अल-मंदब क्षेत्र में जारी तनाव ने वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन को लेकर भी चिंता बढ़ाई है।

इसी बीच भारत ने भी न्यूयॉर्क में अपनी कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की। जयशंकर ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया और यूक्रेन की स्थिति पर चर्चा हुई और उन्होंने रूस तथा ईरान से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंध कानून को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को सामने रखा।

यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले सप्ताह रूस और ईरान से जुड़े नए प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका को अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है। भारत ने कहा है कि वह अपने आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

UNGA में पश्चिम एशिया के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष भी प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। कई देशों के नेताओं ने फिलिस्तीन और इजरायल के बीच स्थायी समाधान के लिए 2-स्टेट समाधान की जरूरत पर जोर दिया है। दूसरी ओर, यूक्रेन युद्ध को लेकर भी नेताओं ने चेतावनी दी कि किसी एक क्षेत्र में होने वाला संघर्ष दुनिया के दूसरे हिस्सों की सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापार को प्रभावित कर सकता है।

ऐसे माहौल में पेजेशकियन का मीनाब स्कूल पीड़ितों की तस्वीरें UNGA में दिखाना ईरान की ओर से युद्ध के मानवीय असर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने रखने का एक महत्वपूर्ण कदम रहा। दूसरी तरफ अमेरिका युद्ध, सुरक्षा और ईरान के परमाणु तथा क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर अपनी स्थिति पर कायम है। बातचीत के रास्ते खुले होने के संकेत जरूर हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच अविश्वास और सैन्य तनाव अभी भी गहरा है। UNGA का मंच अब सिर्फ भाषणों का मंच नहीं रह गया है, बल्कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के अगले कदम, युद्ध के मानवीय असर और संभावित कूटनीतिक समाधान पर पूरी दुनिया की नजरें इसी पर टिकी हैं।

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