राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 8 नवंबर 2026
मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने और फर्जी तथा दोहरी प्रविष्टियों को हटाने के दावे के साथ कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर कर्नाटक से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने स्वीकार किया है कि महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में एक ही व्यक्ति से जुड़े कई मतदाता पहचान पत्र और अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की अंतिम मतदाता सूचियों में एक ही EPIC नंबर दर्ज होने जैसी गड़बड़ियां सामने आई हैं। ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के बाद चुनाव अधिकारी के कार्यालय ने इन विसंगतियों को स्वीकार करते हुए इन्हें डेटा प्रोसेसिंग के दौरान हुई “प्रक्रियागत परिस्थितियों” का नतीजा बताया है।
एक व्यक्ति से जुड़े 803 वोटर ID, SIR के बाद भी गड़बड़ी
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 397 लोगों से जुड़े 803 मतदाता पहचान पत्र सामने आए हैं। यह खुलासा इसलिए और गंभीर है क्योंकि SIR का घोषित उद्देश्य ही मतदाता सूची से दोहरी प्रविष्टियों और ऐसी विसंगतियों को हटाना था। इसके बावजूद पुनरीक्षण के बाद भी एक व्यक्ति के नाम से कई वोटर ID जुड़े रहने के मामले सामने आना पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
रिपोर्ट में ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें एक ही Elector Photo Identity Card (EPIC) नंबर दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की अंतिम मतदाता सूचियों में दर्ज पाया गया। सवाल यह है कि जब एक EPIC नंबर किसी मतदाता की विशिष्ट पहचान के लिए जारी किया जाता है, तो वही नंबर दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों की अंतिम सूची में कैसे मौजूद रह सकता है?
चुनाव आयोग की सफाई, लेकिन जवाब अधूरे
रिपोर्ट सामने आने के बाद कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने माना कि ये विसंगतियां डेटा प्रोसेसिंग के दौरान पैदा हुईं प्रक्रियागत परिस्थितियों के कारण हुईं। कार्यालय ने कहा कि SIR का उद्देश्य ऐसी गड़बड़ियों की पहचान कर उन्हें दूर करना और एक साफ मतदाता सूची तैयार करना था।
लेकिन इस सफाई से कई अहम सवालों का जवाब नहीं मिलता। आखिर 803 मतदाता पहचान पत्रों का संबंध 397 लोगों से कैसे जुड़ा? क्या इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच की गई है? एक ही EPIC नंबर दो विधानसभा क्षेत्रों की अंतिम सूची में कैसे दर्ज हुआ? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—जब SIR के बाद भी ऐसी विसंगतियां मौजूद हैं, तो मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध बताने का आधार क्या है?
SIR की प्रक्रिया पर जवाबदेही जरूरी
यह मामला केवल तकनीकी गलती बताकर समाप्त नहीं किया जा सकता। मतदाता सूची में किसी व्यक्ति की पहचान, उसका नाम और उसका मतदान का अधिकार सीधे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े हैं। एक ही व्यक्ति से कई वोटर ID का जुड़ना और एक ही EPIC नंबर का अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में दिखाई देना गंभीर प्रशासनिक चूक की ओर संकेत करता है।
चुनाव आयोग को इन मामलों की विस्तृत जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितनी प्रविष्टियां प्रभावित हुईं, गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और उसे ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही, जांच के निष्कर्ष और सुधार की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाना था। लेकिन यदि इसी प्रक्रिया के बाद भी ऐसी विसंगतियां सामने आ रही हैं, तो चुनाव आयोग की जवाबदेही तय होना जरूरी है। मतदाता सूची की शुद्धता केवल चुनाव आयोग का प्रशासनिक दावा नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता के भरोसे का सवाल है।



