अंतरराष्ट्रीय/सुरक्षा | ABC NATIONAL NEWS | अदन, यमन | 11 सितंबर 2026
बाब-अल-मंदेब से सिर्फ 80 किलोमीटर दूर है मोखा
यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा करने का दावा किया है। हूती और यमनी अधिकारियों के अनुसार, 10 सितंबर को मोखा उनके नियंत्रण में चला गया। यह घटनाक्रम इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि मोखा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 80 किलोमीटर दूर है। यह जलमार्ग लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है और दुनिया के समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
दुनिया के तेल और सामान की आवाजाही पर असर का डर
बाब-अल-मंदेब से दुनिया के करीब 12 प्रतिशत तेल और दूसरे सामान की समुद्री आवाजाही होती है। इसलिए इस इलाके पर किसी ऐसे समूह का नियंत्रण बढ़ना जो पहले भी जहाजों और समुद्री मार्गों को निशाना बना चुका है, अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए चिंता बढ़ा सकता है।
अगर यहां तनाव बढ़ता है और जहाजों के लिए खतरा बढ़ता है, तो कंपनियों को अपने जहाजों का रास्ता बदलना पड़ सकता है। इससे यात्रा लंबी हो सकती है, माल ढुलाई महंगी हो सकती है और तेल समेत कई जरूरी सामान की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
लाल सागर पहले से ही संवेदनशील क्षेत्र
लाल सागर और बाब-अल-मंदेब का इलाका पहले से ही हूती हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय चिंता का केंद्र रहा है। हूती विद्रोही यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं और राजधानी सना भी उनके कब्जे में है।
अब मोखा जैसे रणनीतिक बंदरगाह पर उनका नियंत्रण बढ़ना इस सवाल को और गंभीर बनाता है कि क्या लाल सागर का समुद्री रास्ता आने वाले दिनों में और असुरक्षित हो सकता है?
भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है यह समुद्री रास्ता
इस घटनाक्रम का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रह सकता। भारत समेत एशिया और यूरोप के बीच होने वाले बड़े समुद्री व्यापार के लिए लाल सागर का रास्ता महत्वपूर्ण है। अगर जहाजों को सुरक्षा कारणों से लंबा रास्ता अपनाना पड़ा, तो समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ सकते हैं।
तेल और दूसरे ऊर्जा उत्पादों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है। ऐसे में यमन का यह घटनाक्रम भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए भी नजर रखने वाला मुद्दा है।
मोखा पर कब्जा क्यों बड़ा संदेश है?
मोखा सिर्फ एक बंदरगाह शहर नहीं है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के करीब होने के कारण रणनीतिक महत्व देती है। यहां हूती प्रभाव बढ़ने का मतलब समुद्री सुरक्षा को लेकर पहले से मौजूद चिंता और बढ़ना है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मोखा पर हूतियों का नियंत्रण कितना मजबूत और कितना लंबे समय तक रहेगा। लेकिन अगर उनका नियंत्रण टिकता है और आसपास के समुद्री इलाके में उनकी सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं, तो इसका असर यमन की लड़ाई से कहीं आगे वैश्विक व्यापार तक पहुंच सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या मोखा पर हूती नियंत्रण लाल सागर के समुद्री रास्ते के लिए नया संकट बनने जा रहा है? और अगर बाब-अल-मंदेब के आसपास जहाजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ा, तो क्या दुनिया को फिर से एक बड़े समुद्री व्यापार संकट और बढ़ती तेल कीमतों का सामना करना पड़ेगा?



