राष्ट्रीय | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 जुलाई 2026
शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
NEET पेपर लीक और देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी शिक्षा और भविष्य को लेकर जवाब मांग रहे छात्रों की बात सुनने के बजाय सरकार उनके साथ “देश के दुश्मनों जैसा व्यवहार” कर रही है। अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ में प्रकाशित अपने लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों की मांग बहुत सीधी है—परीक्षा व्यवस्था में सुधार हो और गड़बड़ी के लिए जिम्मेदारी तय की जाए। लेकिन उनके मुताबिक, सरकार ने बातचीत और समाधान का रास्ता अपनाने के बजाय छात्रों के आंदोलन को दबाने की कोशिश की।
‘ये हमारे ही बेटे-बेटियां हैं’
सोनिया गांधी ने 20 जुलाई को दिल्ली में हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दिन सामने आई तस्वीरें और वीडियो परेशान करने वाले थे। कई युवा घायल हुए और कुछ प्रदर्शनकारियों ने पैलेट लगने की शिकायत भी की है।
उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि सड़कों पर खड़े ये युवा कोई दुश्मन नहीं हैं। “ये हमारे बेटे-बेटियां हैं, हमारे युवा हैं।”
हालांकि, पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है। दिल्ली पुलिस इसके इस्तेमाल से इनकार कर चुकी है, जबकि CRPF ने कहा है कि इससे जुड़ी मीडिया रिपोर्टों की जांच की जा रही है।
शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
सोनिया गांधी ने छात्र आंदोलन को केवल NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं माना। उन्होंने कहा कि इसके पीछे शिक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं में लंबे समय से बढ़ रही निराशा भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में सरकारी शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। सरकारी स्कूलों की संख्या, शिक्षा पर खर्च और निजी शिक्षा पर परिवारों की बढ़ती निर्भरता को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।
उनका कहना है कि अच्छी और सस्ती शिक्षा तक पहुंच मुश्किल होने के कारण बहुत से परिवारों को अपने बच्चों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है। कोचिंग का बढ़ता खर्च भी परिवारों पर भारी पड़ रहा है।
NTA और पेपर लीक पर भी निशाना
सोनिया गांधी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षाओं को बड़े स्तर पर एक ही व्यवस्था के तहत लाने के बावजूद पेपर लीक और दूसरी गड़बड़ियां नहीं रुक सकीं।
उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधा। सोनिया गांधी का कहना है कि लगातार उठ रहे सवालों के बावजूद जिम्मेदारी तय नहीं की गई, जिससे छात्रों का गुस्सा और बढ़ा है।
‘छात्रों की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी’
सोनिया गांधी ने कहा कि किसी भी सरकार की नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा करे। यदि छात्र अपनी परीक्षा, शिक्षा और भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।
उनके मुताबिक, विरोध करने वाले छात्रों को संदेह की नजर से देखने या उनकी आवाज को देश-विरोधी बताने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान तलाशना चाहिए।
सोनिया गांधी के ये आरोप ऐसे समय आए हैं जब जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है और विपक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेपर लीक करने वालों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई का भरोसा दे चुके हैं।
अब यह लड़ाई सिर्फ एक परीक्षा या एक पेपर लीक की नहीं रह गई है। सवाल लाखों युवाओं के उस भरोसे का भी है, जिसके सहारे वे वर्षों मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं। जब परीक्षा पर सवाल उठता है, तो केवल एक प्रश्नपत्र नहीं, बल्कि छात्र का समय, परिवार की कमाई और उसके भविष्य का सपना भी दांव पर लग जाता है।




