राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 14 मई 2026
केंद्र सरकार ने देश की प्रमुख जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation के निदेशक Praveen Sood को एक और वर्ष का सेवा विस्तार देने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रवीण सूद अब मई 2027 तक CBI निदेशक के पद पर बने रहेंगे। प्रवीण सूद का लगातार दूसरा सेवा विस्तार है। उनका मूल दो वर्षीय कार्यकाल मई 2025 में समाप्त होना था, लेकिन तब भी केंद्र सरकार ने उन्हें एक साल का विस्तार दिया था। अब एक बार फिर सरकार ने उनके कार्यकाल को आगे बढ़ा दिया है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) ने चयन समिति की सिफारिश के आधार पर यह विस्तार मंजूर किया है।
प्रवीण सूद 1986 बैच के कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने 25 मई 2023 को CBI निदेशक का पद संभाला था। इससे पहले वे कर्नाटक के डीजीपी और बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक, नए CBI निदेशक की नियुक्ति को लेकर चयन समिति में सहमति नहीं बन पाई थी। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता वाली समिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi और भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया पर असहमति जताई थी और इसे लेकर अपना विरोध दर्ज कराया था।
राहुल गांधी ने कथित तौर पर चयन प्रक्रिया को “पक्षपातपूर्ण” बताते हुए सवाल उठाए थे। इसके बाद सरकार ने मौजूदा निदेशक को ही एक और साल तक पद पर बनाए रखने का निर्णय लिया।
CBI इस समय कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच कर रही है। हाल ही में NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में भी एजेंसी ने कई राज्यों में छापेमारी कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा कई भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों की जांच भी एजेंसी के पास है।
राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां चयन प्रक्रिया और विस्तार को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार समर्थक इसे एजेंसी में “स्थिरता और निरंतरता” बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में CBI कई संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के मामलों की जांच कर रही है, ऐसे में नेतृत्व में अचानक बदलाव से जांच प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता था। इसी कारण सरकार ने अनुभवी अधिकारी को जारी रखने का फैसला किया।
प्रवीण सूद की कार्यशैली को लेकर प्रशासनिक हलकों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं रही हैं। एक ओर उन्हें सख्त और तकनीक आधारित जांच प्रणाली को बढ़ावा देने वाला अधिकारी माना जाता है, वहीं विपक्ष कई मामलों में CBI के इस्तेमाल को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि अगले एक वर्ष तक देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की कमान प्रवीण सूद के हाथों में ही रहेगी।




