राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 23 अगस्त 2026
25वें दौर की वार्ता में आमने-सामने होंगे डोभाल और वांग यी
भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर कूटनीतिक स्तर पर एक बार फिर महत्वपूर्ण बातचीत होने जा रही है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल 24 अगस्त को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचेंगे, जहां वह अपने चीनी समकक्ष और विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता में हिस्सा लेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच 25वें दौर की Special Representatives यानी विशेष प्रतिनिधि वार्ता 25 अगस्त को प्रस्तावित है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव कम करने और संबंधों को सामान्य दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
सीमा विवाद रहेगा बातचीत के केंद्र में
अजीत डोभाल और वांग यी के बीच होने वाली वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा भारत-चीन सीमा विवाद होगा। विशेष प्रतिनिधि तंत्र दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े जटिल और संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक तथा कूटनीतिक स्तर पर बातचीत का प्रमुख माध्यम रहा है। ऐसे में 25वें दौर की बैठक को केवल एक नियमित कूटनीतिक मुलाकात के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। दोनों पक्षों के सामने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों में भरोसा बहाल करने की चुनौती भी है। सीमा पर किसी भी तरह का तनाव सीधे तौर पर दोनों देशों के व्यापक रिश्तों को प्रभावित करता है और इसका असर व्यापार, निवेश, सुरक्षा तथा क्षेत्रीय रणनीति तक दिखाई देता है।
चीन यात्रा का समय भी बेहद अहम
डोभाल की बीजिंग यात्रा की टाइमिंग को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के सितंबर में भारत आने की संभावना जताई जा रही है। भारत में सितंबर में BRICS शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है और इसी सिलसिले में शी चिनफिंग की संभावित भारत यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। ऐसे में डोभाल और वांग यी के बीच बातचीत को आगामी उच्चस्तरीय संपर्क की जमीन तैयार करने वाली कूटनीतिक प्रक्रिया के रूप में भी देखा जा सकता है। हालांकि शी चिनफिंग की यात्रा को लेकर अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम अलग से महत्वपूर्ण होगा, लेकिन उससे पहले सीमा और द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत का होना अपने आप में खास महत्व रखता है।
रिश्तों में तनाव के बाद भरोसा बहाली की चुनौती
भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण गंभीर तनाव से गुजरे हैं। सीमा पर सैन्य तैनाती और टकराव की घटनाओं ने दोनों देशों के बीच विश्वास को प्रभावित किया। इसके बाद सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई, जिनका उद्देश्य सीमा पर तनाव कम करना और सैनिकों के बीच टकराव की संभावनाओं को रोकना रहा है। ऐसे माहौल में विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल तत्काल सीमा प्रबंधन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापक राजनीतिक समझ बनाने की कोशिश भी करती है।
भारत के लिए सीमा पर शांति सबसे अहम
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में स्थिरता के लिए सीमा पर शांति और सौहार्द जरूरी है। सीमा पर तनाव के रहते व्यापार या अन्य क्षेत्रों में रिश्तों को पूरी तरह सामान्य करना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि डोभाल की चीन यात्रा को भारत की सुरक्षा और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के संदर्भ में गंभीरता से देखा जा रहा है। बातचीत में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC से जुड़े मुद्दों, सीमा प्रबंधन और भविष्य में तनाव की स्थिति से बचने के उपायों पर चर्चा की उम्मीद की जा रही है। हालांकि बैठक में क्या-क्या मुद्दे उठेंगे और किसी ठोस सहमति तक पहुंचा जाएगा या नहीं, इसकी पूरी तस्वीर बातचीत के बाद ही सामने आएगी।
BRICS से पहले रिश्तों की परीक्षा
सितंबर में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन से पहले डोभाल-वांग वार्ता भारत और चीन के रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पड़ाव है। अगर दोनों पक्ष सीमा से जुड़े मुद्दों पर आगे बढ़ने और आपसी भरोसा मजबूत करने में सफल होते हैं, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापक संबंधों पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, अगर संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद बने रहते हैं, तो आगामी उच्चस्तरीय संपर्कों के बावजूद रिश्तों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण बनी रह सकती है। फिलहाल निगाहें 25 अगस्त की बातचीत पर हैं—जहां सीमा विवाद के साथ-साथ भारत-चीन संबंधों की आगे की दिशा को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है।




