राष्ट्रीय/ शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | अलीगढ़ | 23 अगस्त 2026
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और नगर निगम के बीच 3.8 एकड़ जमीन को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल थम गया है। जिला मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। जमीन पर मालिकाना हक को लेकर मामला पहले से एसडीएम की अदालत में लंबित है। डीएम ने कहा कि दोनों पक्ष सरकारी संस्थान हैं, इसलिए किसी भी तरह का टकराव उचित नहीं है और विवाद का समाधान कानून के तहत ही होना चाहिए।
जमीन पर कब्जे को लेकर शुरू हुआ विवाद
विवाद उस समय बढ़ गया जब नगर निगम के अधिकारियों ने गुरुवार को AMU के राइडिंग क्लब परिसर से जुड़ी जमीन पर बाड़ लगाने का काम शुरू कर दिया। AMU ने इसे जबरन कब्जे की कोशिश बताया, जबकि नगर निगम का दावा है कि उसके रिकॉर्ड के मुताबिक यह जमीन पिछले करीब 40 वर्षों से नगर निगम की है।
डीएम के आदेश के बाद फिलहाल जमीन AMU के कब्जे में ही रहेगी, जब तक एसडीएम की अदालत इस मामले में फैसला नहीं कर देती।
AMU ने पेश किए पुराने दस्तावेज
AMU के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय ने डीएम के सामने 1923 का मूल भूमि दस्तावेज और यूनाइटेड प्रोविंसेज सरकार की गजट अधिसूचना पेश की है। इसके अलावा 1940 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन गवर्नर की ओर से जारी दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें जमीन के AMU को आवंटन का उल्लेख होने का दावा किया गया है।
विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया है कि 1992 में जमीन के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई थी और उसे इसकी जानकारी वर्ष 2003 में मिली।
मामला पहले से अदालत में लंबित
AMU का कहना है कि उसने इस जमीन के विवाद को लेकर 29 मार्च 2025 को एसडीएम अदालत का दरवाजा खटखटाया था और मामला अभी लंबित है। विश्वविद्यालय ने नगर निगम की कार्रवाई के तरीके पर भी सवाल उठाया और कहा कि पूरी कार्रवाई कथित तौर पर रात के अंधेरे में चुपचाप की गई, जिससे उसके इरादे को लेकर संदेह पैदा होता है।
AMU की संपत्तियों की सुरक्षा पर भी सवाल
AMU के पूर्व जनसंपर्क विभाग प्रमुख राहत अबरार ने विश्वविद्यालय की संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि AMU को 19वीं सदी के आखिर से बड़ी मात्रा में जमीन मिली, लेकिन समय के साथ विश्वविद्यालय के प्रशासन ने अपनी संपत्तियों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की।
अब असली फैसला दस्तावेजों से होगा
फिलहाल डीएम के आदेश ने आमने-सामने के टकराव को रोक दिया है, लेकिन जमीन का मालिकाना हक अभी तय नहीं हुआ है। अब एसडीएम अदालत में पेश किए गए पुराने दस्तावेज, सरकारी रिकॉर्ड और दोनों संस्थानों के दावों की जांच के बाद फैसला होगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है—3.8 एकड़ जमीन का असली मालिक कौन है? इसका जवाब अब प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया से सामने आएगा। माना जाता है कि यह संपत्ति 500 करोड़ की है।




