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डी.के. शिवकुमार ने राज्यपाल से मिलकर सरकार गठन का किया दावा पेश

राजनीतिक | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 31 मई 2026

कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर शनिवार को विराम लग गया, जब कांग्रेस विधायक दल (CLP) के नवनिर्वाचित नेता डी.के. शिवकुमार ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर नई सरकार बनाने का दावा पेश किया। इसके साथ ही राज्य में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो गई और कांग्रेस ने नेतृत्व परिवर्तन को शांतिपूर्ण तथा संगठित तरीके से अंजाम देकर एकजुटता का संदेश दिया।

राज्यपाल से मुलाकात के दौरान डी.के. शिवकुमार के साथ निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, वरिष्ठ मंत्री और कांग्रेस के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। राजभवन में हुई इस मुलाकात के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि शिवकुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और नई कैबिनेट का गठन करेंगे।

इससे पहले बेंगलुरु के विधान सौधा में आयोजित कांग्रेस विधायक दल की बैठक में डी.के. शिवकुमार को सर्वसम्मति से नेता चुना गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उनके नाम का प्रस्ताव स्वयं सिद्धारमैया ने रखा। लगभग 17 वर्षों तक कांग्रेस विधायक दल का नेतृत्व करने वाले सिद्धारमैया ने इस अवसर पर पार्टी की एकता को प्राथमिकता देते हुए नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। वरिष्ठ नेता जी. परमेश्वर ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसके बाद शिवकुमार के नाम पर औपचारिक मुहर लग गई।

कांग्रेस नेतृत्व का यह फैसला केवल मुख्यमंत्री बदलने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी ने 2028 के विधानसभा चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार दोनों में नई ऊर्जा लाने का प्रयास किया है। डी.के. शिवकुमार को लंबे समय से कांग्रेस का संकटमोचक और मजबूत संगठनकर्ता माना जाता रहा है। उन्होंने कई राजनीतिक संकटों के दौरान पार्टी को टूटने से बचाने और सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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मुख्यमंत्री बनने जा रहे शिवकुमार के सामने चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। राज्य में विकास परियोजनाओं को गति देना, चुनावी वादों को पूरा करना, क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना और पार्टी के भीतर विभिन्न गुटों को साथ लेकर चलना उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी। साथ ही उन्हें भाजपा और जेडी(एस) जैसे विपक्षी दलों के आक्रामक राजनीतिक हमलों का भी सामना करना पड़ेगा।

कांग्रेस नेतृत्व ने हालांकि यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता परिवर्तन किसी संघर्ष का परिणाम नहीं बल्कि पूर्व निर्धारित राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। पार्टी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक परंपरा और संगठनात्मक अनुशासन का उदाहरण बताया है। सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के प्रति सम्मान व्यक्त कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि कांग्रेस में किसी प्रकार का आंतरिक टकराव नहीं है।

सूत्रों के अनुसार नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संभावना है कि शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व सहित कई प्रमुख विपक्षी नेताओं को भी आमंत्रित किया जाएगा। नई कैबिनेट में क्षेत्रीय, जातीय और सामाजिक संतुलन को विशेष महत्व दिए जाने की संभावना है।

कर्नाटक में यह नेतृत्व परिवर्तन केवल एक राजनीतिक घटना नहीं बल्कि राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री के रूप में डी.के. शिवकुमार अपनी नई जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं और कांग्रेस सरकार को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।

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