राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 जुलाई 2026
देश में डिजिटाइज्ड जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों की बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार ने फर्जी और अनधिकृत प्रमाणपत्र जारी होने की शिकायतों पर सख्त कदम उठाए हैं। भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में कड़ी निगरानी और सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय ने कहा है कि कुछ मामलों में रजिस्ट्रार के यूजर आईडी, पासवर्ड और ओटीपी अनधिकृत लोगों के साथ साझा किए जाने के कारण सुरक्षा में सेंध लगी है। इससे पुराने रिकॉर्ड के गलत तरीके से डिजिटलीकरण और फर्जी प्रमाणपत्र जारी होने की शिकायतें सामने आई हैं।
12 जून को राज्यों को भेजे गए पत्र में उप रजिस्ट्रार जनरल ए.के. पांडेय ने कहा कि ऐसे मामले सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं और जन्म-मृत्यु जैसे महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड की प्रमाणिकता पर सवाल खड़े करते हैं।
इसके बाद 6 जुलाई को केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे उन पंजीकरण इकाइयों की पहचान करें, जहां जन्म या मृत्यु पंजीकरण की संख्या में असामान्य वृद्धि देखी गई है। ऐसे मामलों की विशेष जांच कर अनियमितताओं पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।
केंद्र सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों का डिजिटलीकरण पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और प्रमाणिक रहे। इसके लिए डिजिटल लॉग, उपयोगकर्ता गतिविधियों की निगरानी और पहचान सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम नागरिकों की पहचान, सरकारी योजनाओं और कानूनी दस्तावेजों का आधार है। इसलिए किसी भी प्रकार की जालसाजी या अनधिकृत प्रमाणपत्र जारी होने की घटनाओं को रोकना राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण है। नए निर्देशों के बाद राज्यों में जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया पर पहले से अधिक कड़ी निगरानी रखी जाएगी।




