अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग/नई दिल्ली | 13 जुलाई 2026
तिब्बत में ब्रह्मपुत्र (यारलुंग त्सांगपो) नदी पर बन रहे चीन के 147 अरब डॉलर के मेगा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर अब खुद चीन के वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है। एक चीनी भूवैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया है कि परियोजना के नीचे सक्रिय भूगर्भीय फॉल्ट लाइन (Paizhen Fault) मौजूद है, जो भविष्य में बांध और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
यह अध्ययन चीन के सरकारी संस्थान चाइना जियोलॉजिकल सर्वे की देखरेख में प्रकाशित हुआ है। इसमें कहा गया है कि पाइझेन फॉल्ट आज भी सक्रिय है और इसका असर बांध, जलाशय, सड़क, पुल और सुरंग जैसी परियोजनाओं पर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, लगातार भूगर्भीय हलचल के कारण आसपास की चट्टानों में दरारें पड़ चुकी हैं, जिससे भारी निर्माण परियोजनाओं की नींव कमजोर हो सकती है।
रिपोर्ट में 2017 में तिब्बत के मिलिन क्षेत्र में आए 6.9 तीव्रता के भूकंप का भी उल्लेख किया गया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भूकंप आने की स्थिति में भूस्खलन और पहाड़ी ढलानों के धंसने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे परियोजना और वहां काम कर रहे लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने जोखिम कम करने के लिए संवेदनशील ढलानों को मजबूत करने और अतिरिक्त सुरक्षा संरचनाएं बनाने की सिफारिश की है।
यह निष्कर्ष चीन सरकार के अब तक के आधिकारिक दावों से अलग है। बीजिंग लगातार कहता रहा है कि यह परियोजना उच्चतम इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप बनाई जा रही है, पर्यावरण की रक्षा करेगी और नदी क्षेत्र में आपदा जोखिम कम करने में मददगार होगी। चीन का यह भी दावा रहा है कि परियोजना का भारत और बांग्लादेश जैसे निचले प्रवाह वाले देशों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
गौरतलब है कि यह मेगा डैम अरुणाचल प्रदेश की सीमा के बेहद करीब बनाया जा रहा है। ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से निकलकर भारत और फिर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। ऐसे में इस परियोजना को लेकर भारत पहले भी जल सुरक्षा, पर्यावरण और भूकंपीय जोखिम से जुड़ी चिंताएं व्यक्त करता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के अपने वैज्ञानिकों की यह चेतावनी इस परियोजना की सुरक्षा पर नए सवाल खड़े करती है और भविष्य में इस मेगा डैम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस और तेज हो सकती है।




