Home » National » सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: ₹661 करोड़ सरकारी धन घोटाले में छह ठिकानों पर छापेमारी

सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: ₹661 करोड़ सरकारी धन घोटाले में छह ठिकानों पर छापेमारी

राष्ट्रीय / अपराध | समा मेहरा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 जून 2026

नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों के सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और गबन से जुड़े ₹661 करोड़ के बड़े घोटाले की जांच में महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए छह स्थानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में की गई। जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला सरकारी धन को कथित रूप से गलत तरीके से निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किए जाने और बैंक खातों के माध्यम से धन के हस्तांतरण से जुड़ा हुआ है।

सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक छापेमारी शुक्रवार, 5 जून को की गई थी, लेकिन इसकी जानकारी रविवार को सार्वजनिक की गई। एजेंसी ने जिन स्थानों पर तलाशी ली, उनमें हरियाणा कैडर के कुछ वरिष्ठ लोक सेवकों से जुड़े परिसर और नोएडा स्थित विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड तथा उसके निदेशक के ठिकाने शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई चल रही जांच का हिस्सा है और मामले से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड तथा वित्तीय लेन-देन से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने के उद्देश्य से की गई।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों का सरकारी धन कुछ बैंकों में जमा कराया गया था। आरोप है कि इस धन के प्रबंधन और निवेश की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं और बड़ी राशि का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। जांच के दायरे में विशेष रूप से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू फाइनेंस बैंक से जुड़े वित्तीय लेन-देन भी शामिल हैं। हालांकि अभी तक किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं हुई है और जांच एजेंसी पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल कर रही है।

ALSO READ  मैं हूँ — ZAS 14 : सर जियाउद्दीन हॉल का एक कमरा, जो आज भी धड़कता है — इल्म और तहज़ीब की साँसों से आबाद एक चौखट

सूत्रों के अनुसार सीबीआई को संदेह है कि सरकारी धन के निवेश और प्रबंधन के नाम पर कुछ निजी संस्थाओं और अधिकारियों के बीच मिलीभगत हुई हो सकती है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए विभिन्न दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य वित्तीय साक्ष्य जब्त किए गए हैं। एजेंसी अब इन दस्तावेजों का परीक्षण कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित गड़बड़ी कैसे हुई, किस स्तर पर निर्णय लिए गए और इस पूरे मामले से किसे लाभ पहुंचा।

₹661 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता का यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। सरकारी धन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं और ऐसे में इस स्तर की कथित वित्तीय गड़बड़ी ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह हाल के वर्षों में सरकारी धन के दुरुपयोग के सबसे बड़े मामलों में से एक माना जा सकता है।

सीबीआई मामले की गहन जांच कर रही है और एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी पूछताछ, दस्तावेजी जांच तथा अन्य कानूनी कार्रवाइयां की जा सकती हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस कथित घोटाले की वास्तविक तस्वीर क्या है और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं। देशभर की निगाहें अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच पर टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *