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कावेरी विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, तमिलनाडु ने कर्नाटक के खिलाफ खोला कानूनी मोर्चा

विजय सरकार ने शीर्ष अदालत से मांगा CWMA के आदेश का पालन कराने का निर्देश; कर्नाटक के काबिनी और कृष्णराज सागर जलाशयों से 15 दिनों तक 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने की मांग

राष्ट्रीय/ तमिलनाडु | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 3 अगस्त 2026

कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को शीर्ष अदालत का रुख करते हुए कर्नाटक को कावेरी का निर्धारित पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है।

तमिलनाडु सरकार ने अपनी याचिका में Cauvery Water Management Authority (CWMA) के 30 जुलाई के फैसले को लागू कराने की मांग की है। इस फैसले के तहत कर्नाटक के काबिनी और कृष्णराज सागर (KRS) जलाशयों से 15 दिनों तक 3,500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की बात है।

तमिलनाडु का आरोप—नहीं मिल रहा पर्याप्त पानी

तमिलनाडु का कहना है कि उसे कावेरी नदी से अपने हिस्से का पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। राज्य ने अब सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि कर्नाटक को CWMA के फैसले का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए।

यह मामला ऐसे समय सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है जब दोनों राज्यों में कावेरी के पानी को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से बढ़ा हुआ है।

कर्नाटक में भी बढ़ रहा विरोध

कर्नाटक में तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े जाने के खिलाफ किसान संगठनों, कन्नड़ संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से विरोध हो रहा है। 13 अगस्त को कर्नाटक बंद का आह्वान भी किया गया है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इससे पहले विपक्ष, किसान संगठनों और कन्नड़ संगठनों से प्रस्तावित बंद वापस लेने की अपील करते हुए कहा था कि राज्य सरकार पूरे मामले और कानूनी विकल्पों पर नजर रख रही है।

अब सुप्रीम कोर्ट पर निगाहें

तमिलनाडु के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद दशकों पुराने कावेरी विवाद ने एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर नया मोड़ ले लिया है।

एक तरफ तमिलनाडु अपने हिस्से का पानी सुनिश्चित कराने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप चाहता है, वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक में पानी छोड़े जाने को लेकर विरोध तेज है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम दोनों राज्यों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

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