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सोशल मीडिया पर BJP–कांग्रेस की तीखी जंग: ‘अय्याश’ वाले वीडियो से शुरू हुई लड़ाई गुजरात के पुराने ‘स्टिंग’ और ‘जासूसी’ विवाद तक पहुँची

एबीसी डेस्क 11 दिसंबर 2025

देश की सियासत एक बार फिर सोशल मीडिया की रणभूमि पर उतर आई है। BJP और कांग्रेस के बीच ट्विटर (X) पर छिड़ी यह ताज़ा जंग किसी चुनावी सभा या बहस से नहीं, बल्कि एक वीडियो पोस्ट से शुरू हुई—और कुछ ही घंटों में आरोपों, पलटवारों और वर्षों पुराने विवादों को खींच लाने वाली बड़ी राजनीतिक टक्कर में बदल गई।

BJP के आधिकारिक हैंडल से पोस्ट किया गया एक वीडियो इस तूफ़ान का कारण बना। वीडियो के साथ कैप्शन लिखा था— “Gandhi banke aaya hu, meri harkate magar ayyaash hain…”
यह व्यंग्यात्मक टिप्पणी साफ़ तौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को निशाना बनाती दिखाई दी। वीडियो में एक सार्वजनिक कार्यक्रम का दृश्य दिखाया गया है जहाँ राहुल गांधी किसी के साथ चलते नज़र आते हैं—लेकिन BJP ने इसे ‘अय्याशी’ की कहानी के रूप में पेश करने की कोशिश की।

कांग्रेस ने इस पोस्ट को सिर्फ “घटियापन” नहीं कहा, बल्कि इसे ‘वोट चोरी’ के खुलासों से बौखलाई BJP की बौखलाहट बताया। कांग्रेस की प्रतिक्रिया में जो आरोप लगाए गए, वह और अधिक विस्फोटक थे। पार्टी ने सीधे-सीधे गुजरात की राजनीति के पुराने और विवादित प्रसंगों को सामने रख दिया। कांग्रेस ने सवाल उठाए—गुजरात के मुख्यमंत्री आवास में किस लड़की को बंधक बनाकर रखा गया था? किस लड़की की जासूसी करवाई जा रही थी? और कौन सा मुख्यमंत्री चीन में “अय्याशी” करने के लिए चर्चित रहा?

ये सवाल साधारण नहीं थे—ये वही मामले हैं जो वर्षों तक सार्वजनिक चर्चा और राजनीतिक विमर्श में छाए रहे, लेकिन कभी स्पष्ट निष्कर्ष के साथ समाप्त नहीं हुए। कांग्रेस ने इन आरोपों को फिर से उछालकर BJP की नैतिकता और व्यक्तिगत आरोपों की राजनीति पर पलटवार किया। पार्टी ने लिखा—
“जब बात निकली है तो सवाल पूछे जाएंगे…”
और साथ ही BJP पर आरोप लगाया कि वह अपने नेताओं पर उठते इन गंभीर सवालों का जवाब जनता से छिपा रही है।

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इस राजनीतिक संघर्ष का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि BJP जिस वीडियो के जरिए राहुल गांधी की छवि पर चोट करना चाहती थी, उससे अधिक तीखी प्रतिक्रिया कांग्रेस की ओर से सामने आई। कांग्रेस का संदेश साफ़ था—अगर BJP निजी हमलों की राजनीति करेगी, तो कांग्रेस भी पुराने विवादों का पिटारा खोलने से पीछे नहीं हटेगी। इस जवाब ने बहस को एक नैतिक टिप्पणी से उठाकर सीधे चरित्र और शासन से जुड़ी भारी आरोपों की ओर मोड़ दिया।

इस घटनाक्रम ने यह भी साबित किया कि सोशल मीडिया अब सिर्फ संदेशों का मंच नहीं रहा; यह राजनीतिक रणनीति, मनोवैज्ञानिक युद्ध और विपक्ष को घेरने का तेज़ हथियार बन चुका है। एक वीडियो पोस्ट से शुरू हुई लड़ाई जल्द ही उन मामलों तक पहुँच गई जिन्हें पार्टियाँ आमतौर पर चुनावों में भी सावधानी से छूती हैं।

यह विवाद आगे कैसे बढ़ेगा, यह कहना मुश्किल है। लेकिन इतना तय है—2025 की सियासी लड़ाई में सोशल मीडिया सिर्फ युद्ध का मैदान नहीं, बल्कि युद्ध का नेतृत्व कर रहा है।

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